एमसीआई निगरानी: चिकित्सकों के नाम पर सहमति

एमसीआई निगरानी: चिकित्सकों के नाम पर सहमति

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के कामकाज की निगरानी के लिए केंद्र सरकार की ओर से सुझाये गये पांच चिकित्सकों के नाम पर आज अपनी सहमति जता दी। मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सुझाये गये चिकित्सक योग्य एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और वह उनके नामों से संतुष्ट हैं। संविधान पीठ के अन्य सदस्य हैं- न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर। शीर्ष अदालत ने केन्द्र को इस बात की छूट दी कि यदि कोई चिकित्सक इस निगरानी समिति का हिस्सा नहीं बनना चाहता हो तो उसके स्थान पर दूसरे चिकित्सक को शामिल किया जा सकता है। निगरानी समिति का कार्यकाल गत एक मई को समाप्त होने के बाद शीर्ष अदालत ने कल इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार को नयी समिति के लिए पांच चिकित्सकों के नाम देने के लिए आज सुबह साढ़े दस बजे तक समय दिया था। न्यायालय ने पिछले साल दो मई को एक वर्ष के लिए निगरानी समिति का गठन करते समय कहा था कि केन्द्र द्वारा इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होने तक यह एमसीआई के कामकाज की निगरानी करेगी। समिति का कार्यकाल इस वर्ष एक मई को समाप्त हो चुका है। संविधान पीठ ने केंद्र सरकार को उस चिकित्सक को हटाने की अनुमति भी दे दी, जो समिति का हिस्सा नहीं रहना चाहते। इससे पहले न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या प्रस्तावित चिकित्सक अपना समय दे पायेंगे? केंद्र सरकार ने कहा कि इन चिकित्सकों ने अपनी सहमति दे दी है और ये तुरंत अपना काम शुरू कर देंगे। इन चिकित्सकों की सूची में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दो सेवानिवृत्त चिकित्सक शामिल हैं।

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