तनाव से परेशान विदेशी पर्यटक आयुर्वेद की शरण में

तनाव से परेशान विदेशी पर्यटक आयुर्वेद की शरण में

भागदौड़ की जीवन शैली और कार्यालय में अधिक कामकाज के कारण परेशान विदेशी पर्यटक आयुर्वेद के सहारे अपना तनाव दूर करने भारत आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश तो फ्रांस के पर्यटकों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से तनाव दूर करने का प्रमुख केंद्र पर्यटन स्थल बन गया है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय भूगोल संघ के उपाध्यक्ष प्रो.आर बी ङ्क्षसह का जिनका एक शोध पत्र अमेरिका के प्रसिद्ध स्वास्थ्य जर्नल कम्युनिटी हेल्थ मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ इशू के अंक में प्रकाशित हुआ है। इस शोध पत्र की सहायक लेखिका नीतू गोस्वामी हैं। हिमाचल के कांगड़ा जिले में फ्रांस के पर्यटकों के तनाव प्रबंधन पर किये गए सर्वेक्षण पर आधारित शोध पत्र में यह जानकारी दी गयी है। दिल्ली विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष के अनुसार विश्व में जीवन शैली और दफ्तर में काम के अधिक घंटे होने के कारण लोग तनाव के अधिक शिकार होते जा रहे हैं इसलिए वे अपना इलाज कराने के लिए भारत आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार को योग के साथ-साथ आयुर्वेद के प्रचार प्रसार पर अधिक ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। भूगोल विभाग भी पर्यावरण और वनों में पाए जाने वाले मेडिसिनल पौधों आदि का भी अध्ययन करता है। शोध पत्र के अनुसार देश में कुल 45 लाख डॉक्टर हैं और आबादी सवा अरब हो गयी है, इस तरह औसतन 1200 लोगों पर एक डॉक्टर हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति और होमयो पैथ के सात लाख 85000 डॉक्टर हैं जबकि इनमें से आयुर्वेद के चार लाख 20,000 डॉक्टर हैं। देश में आयुर्वेद के 3000 अस्पताल और 22000 डिस्पेंसरियां हैं और 9000 दवा की फैक्ट्रियां हैं।

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