सर्वेक्षण के बाद हुआ चौंकाने वाला खुलासा...22 हजार करोड से अधिक जेब खर्च में उड़ा देते हैं बच्चे

सर्वेक्षण के बाद हुआ चौंकाने वाला खुलासा...22 हजार करोड से अधिक जेब खर्च में उड़ा देते हैं बच्चे

नई दिल्ली। देश के शहरी बच्चे सालाना 22 हजार करोड रूपये से ज्यादा की राशि जेब खर्च में उड़ा देते हैं, जो कि कुछ छोटे देशों की कुल अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा है। बच्चों के कार्टून चैनल 'पोगो' की ओर से देश के सभी बडे शहरों और एक लाख से कम की आबादी वाले कस्बों में 'टर्नर न्यू जेनरेशन -2०16' शीर्षक से कराये गये ताजा सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय बच्चे जेब खर्च के रूप में मिलने वाली 22594 करोड रूपये से ज्यादा की राशि खर्च करते हैं। यह भूटान, मालद्वीव और अरूबा जैसे 5० छोटे देशों के कुल सकल घरेलू उत्पाद से ज्यादा है। पोगो ने इससे पहले 2०12 में ऐसा सर्वेक्षण कराया था। माता-पिता ने बच्चों का जेब खर्च 2०12 के 275 रूपये माह से करीब दोगुना बढाकर 555 रूपये कर दिया है। बच्चे आधा जेब खर्च बचा लेते हैं। जेब खर्च बचाने वालों में अधिकांश लडकियां हैं। शेष 5० प्रतिशत वे कपडे, जूते, जंक फूड और खिलौने आदि खरीदने में खर्च करते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार 9० प्रतिशत शहरी बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण हैं और वे उनका धडल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। बच्चे इन उपकरणों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल गेम खेलने तथा फोन सुनने में तथा उसके बाद संगीत सुनने, मैसेज टाइप करने और वीडियो देखने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। तकरीबन 32 प्रतिशत बच्चे ऐप्लीकेशन डाउनलोड करते हैं, जिनमें से 7० प्रतिशत ऐसे डाउनलोड होते हैं, जिनके लिए पैसा देना पडता है। बच्चे मीडिया के रूप में सबसे ज्यादा टेलीविजन का इस्तेमाल कर रहे हैं। बच्चों की अस्वास्थ्यकर जीवन शैली को लेकर माता-पिता की चिंता 2०12 के मुकाबले ज्यादा बढ गई है। बच्चों के अनियमित खाने -पीने, भूख कम लगने तथा उनके खराब स्वास्थ्य से अभिभावकों की चिंता की लकीरें बढ गयीं हैं। सात से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों का बाहर खेलना-कूदना पहले से कम हो गया और वे आलसी बने रहते हैं। इन शहरों के सात से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के 48 प्रतिशत अभिभावक और 4-6 आयु वर्ग के 29 प्रतिशत माता -पिता बच्चों को ट्यूटशन भेजते हैं। पचपन प्रतिशत अभिभावक बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा अन्य रूचियों सम्बन्धी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अपनी पहली की पीढी के मुकाबले अब बच्चे नये -नये विषयों और कैरियर को चुन रहे हैं।

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