रोजाना औसतन 432 ट्रेनें चलती हैं विलंब से

रोजाना औसतन 432 ट्रेनें चलती हैं विलंब से

नई दिल्ली। सरकार ने आज राज्यसभा में कहा कि चालू वर्ष में अगस्त से लेकर 15 दिसम्बर तक हर दिन विभिन्न कारणों से औसतन 432 ट्रेन विलंब से चली हैं, जबकि 114० ट्रेन अपने गंतव्य पर निर्धारित समय पर या उससे पहले पहुंची है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने समाजवादी पार्टी के नीरज शेखर के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सर्दियों के दौरान कोहरे के कारण भी गाडिय़ों के आवागमन में अत्यधिक विलंब हुआ है। इसके साथ ही कुछ तकनीक और कुछ अन्य कारणों से भी गाडिय़ां के परिचालन में देरी होती है। उन्होंने कहा कि अगस्त से लेकर 15 दिसम्बर तक पूरे देश में कुल 59147 ट्रेन विलंब से अपने गंतव्य पर पहुंची है। इसके आधार पर हर दिन औसतन 432 ट्रेन विलम्ब से चली है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हर दिन 114० गाडिय़ां गंतव्य पर निर्धारित समय या उससे पहले पहुंची है। इस दौरान हर दिन औसतन 51 गाडिय़ां रद्द की गई है और 55 गाडिय़ों के मार्ग परिवर्तित किया गया या निर्धारित गंतव्य से पहले उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने कहा कि बलिया से दिल्ली और मुंबई को जोडऩे वाली अधिकांश ट्रेनों का परिचालन गर्मियों के दौरान संतोषजनक रहा है। गर्मियों और सर्दियों के दौरान विलंब से चलने वाली अधिकांश गाड़यिां ऐसे रूट से गुजरती हैं जिस रूट का उपयोग 15० प्रतिशत से अधिक है। ऐसी स्थिति में ट्रेनों के परिचालन में कुछ विलंब होता है। उन्होंने कहा कि इन रूटों में टूंडला- इलाहाबाद वाराणसी, गाजियाबाद- मुरादाबाद- लखनऊ- वाराणसी, गाजियाबाद - मुरादाबाद -लखनऊ- बाराबंकी - गोरखपुर और वाराणसी- इलाहाबाद - मानिकपुर- इटारसी- खंडवा शामिल है। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि समय पर ट्रेन चलाना सरकार की प्राथमिकता है और इसी के मद्देनजर मोदी सरकार के कार्यकाल में तीन वर्ष में 13 हजार किलोमीटर लंबी रेल लाइन का दोहरीकरण किया गया है। इससे कंजेशन को कम करने में मदद मिलने के साथ ही ट्रेन को समय पर चलाने में सहयोग मिलेगा।

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