बूढ़े पशुओं की देखरेख करने वालों गौशालाओं को ही मिलेगी वित्तीय मदद

बूढ़े पशुओं की देखरेख करने वालों गौशालाओं को ही मिलेगी वित्तीय मदद

नई दिल्ली। पशु कल्याण बोर्ड ने फैसला किया है कि अब उन्हीं गौशालाओं और पशु कल्याण संगठनों को सरकार की ओर से वित्तीय मदद मिलेगी जो बूढ़े, बीमार तथा अनुत्पादक पशुओं की देखरेख करेंगे।
बोर्ड के अध्यक्ष एस.पी. गुप्ता ने आज बताया कि बोर्ड की योजना के तहत गोशालाओं तथा पशु कल्याण संगठनों को वित्तीय मदद दी जाती है। यह राशि अब सिर्फ उसी स्थिति में दी जायेगी जब गोशालाओं और इन संगठनों में बूढ़े, बीमार तथा अनुत्पादक पशुओं की देखरेख की जाएगी। इसमें पशुओं के लिए आश्रय, चारा, आहार, दवाइयाँ, पानी की व्यवस्था, ड्रेनेज, आश्रय की मरम्मत, पशुओं सह-उत्पादों के मूल्य वद्र्धन और उनके विपणन के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। उन्होंने बताया कि नये प्रावधानों के तहत कम से कम 50 एकड़ क्षेत्र वाले चारागाहों के विकास, पशुओं के लिए आश्रय बनाने, पंचगव्य और बायोगैस संयंत्र लाने तथा अन्य संबद्ध कार्यों के लिए 50 लाख रुपये की मदद दी जायेगी। साथ ही पशु कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। इसके लिए चालू वित्त वर्ष में 22 करोड़ रुपये की माँग की गयी है। यदि कोई संस्थान या स्थानीय निकाय आपदाओं, अवैध परिवहन, अवैध बूचरखानों तथा परिसंपत्ति विवाद के पशुओं का पालन करता है तो उसे भी वित्तीय मदद दी जायेगी। इसके लिए चालू वित्त वर्ष में 10 करोड़ रुपये माँगे गये हैं। पशुओं के लिए आश्रय निर्माण के लिए 22.50 लाख रुपये और पशु एंबुलेंस के लिए 4.5 लाख रुपये की मदद दी जायेगी। श्री गुप्ता ने कहा कि किसी भी जानवर के खिलाफ क्रूरता को रोकना तथा उनका दर्द और कष्ट कम करना बोर्ड की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पशुओं के खिलाफ क्रूरता रोकने के लिए बोर्ड राज्य से लेकर जिला स्तर तक एक नेटवर्क बनायेगा। इस पशु क्रूरता नियंत्रण नेटवर्क में जगह-जगह पशु प्रेमियों को अवैतनिक पशु कल्याण अधिकारी नियुक्त किया जायेगा। उन्हें नये सिरे से पशु कल्याण अधिकारी का पहचान पत्र जारी किया जायेगा तथा पहले जारी सभी पशु कल्याण अधिकारी पहचान पत्रों की वैधता 10 जुलाई को समाप्त हो जायेगी।

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