प्रदेश में तीन नई खंडपीठ की पुरजोर मांग

प्रदेश में तीन नई  खंडपीठ की पुरजोर मांग

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की जनता को सस्ता और सर्वसुलभ न्याय सुनिश्चित कराने के लिए गोरखपुर, आगरा और मेरठ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित करने की आज लोकसभा में पुरजोर मांग की गयी और संसद से इसमें हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया।
मेरठ से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त)संशोधन विधेयक -2०17 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस समय राज्य में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सिर्फ लखनऊ खंडपीठ है। लखनऊ खंडपीठ में 14 जिलों के मामले आते हैं, शेष सभी जिलों के लोगों को सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जाना पड़ता है। बड़ा राज्य होने के कारण लोगों को 5०० से 8०० किलोमीटर की दूरी तय करके सुनवाई के लिए जाना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और वंचित तबके को होती है। उन्होंने कहा कि इन खंडपीठों की स्थापना राज्य की जनता की पुरानी मांग है और समय-समय पर इसके लिए आन्दोलन भी हुए हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत नयी खंडपीठ की स्थापना असंभव है, इसलिए संसद को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। भाजपा सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों और न्यायालयों में रिक्तियों की स्थिति भयावह है। अदालतों में 6० लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं और न्यायाधीशों के सैकड़ों पर रिक्त हैं। विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश के मौजूदा कानून के तहत प्रधान पीठ की सिफरिश के बाद ही नयी खंडपीठ की स्थापना की जा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक बार प्रधान पीठ की सिफारिश आने पर सरकार इस पर खुले दिमाग से विचार करेगी।

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