डिजिटल दुनिया में बढ़ रहा बच्चों के लिए खतरा

डिजिटल दुनिया में बढ़ रहा बच्चों के लिए खतरा

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने डिजिटल दुनिया में बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे यौन अपराध और अन्य खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे निबटने के लिए स्कूलों, अभिभावकों और नीति निर्धारकों को ज्यादा जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है। यूनीसेफ की ओर से 'द स्टेट ऑफ द वल्र्ड चिल्ड्रन 2०17: चिल्ड्रन इन ए डिजिटल वर्ल्ड शीर्षक से आज यहां जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों में से एक तिहाई बच्चे हैं। शिक्षा से लेकर मनोरंजन तक हर क्षेत्र में आज बच्चे इंटरनेट का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन जिस पैमाने पर यह इस्तेमाल हो रहा है, उस स्तर पर डिजिटल दुनिया के खतरों से उन्हें सुरक्षित रखने की कोई कारगर व्यवस्था नहीं की गई है। यूनीसेफ की ओर से पहली बार बच्चों पर डिजिटल तकनीक के प्रभावों पर समग्रता में तैयार की गयी इस रिपोर्ट में एक तरफ जहां वंचित तबके के बच्चों तक भी इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने की बात कही गयी है तो वहीं दूसरी ओर संपन्न वर्गों के बच्चों को इंटरनेट के खतरों और नुकसान का सामना करने के लिए यूं ही छोड़ दिये जाने का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट में इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच के मामले में लड़के और लड़कियों के बीच लेकर गैर बराबरी की स्थिति को पाटने की बात भी की गयी है। यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक एन्थोनी लेक का कहना है कि अच्छा हो या बुरा डिजिटल तकनीक आज हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा और हकीकत बन चुकी है। डिजिटल दुनिया में हमारे सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ नुकसानों को कम करना है तो दूसरे ओर हर बच्चे तक इंटरनेट के फायदों को अधिक से अधिक रूप में पहुंचाना भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरनेट का इस्तेमाल वंचित तबकों के बच्चों को सूचना पहुंचाने, कौशल निर्माण और अपने विचारों के वास्ते संवाद करने हेतु मंच प्रदान कर सकता है, लेकिन दुनिया के 34 करोड़ 6० लाख ऐसे बच्चों को अभी तक यह सुविधा नहीं मिल सकी है जिससे गैर बराबरी बढ़ रही है। रिपोर्ट में दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि इंटरनेट कैसे बच्चों के लिए खतरों में चपेट में आने का मौके बढ़ा रहा है। इसमें उनकी निजी सूचना का दुरुपयोग और नुकसानदायक सामग्री तक पहुंच को बढ़ावा मिल रहा है। निगरानी के अभाव ने इसे और खतरनाक बना दिया है। इससे मानव तस्करी और बाल यौन उत्पीडऩ की घटनाएं बढ़ रही हैं। बाल उत्पीडऩ से जुड़ी सबसे ज्यादा सामग्रियां इंटरनेट पर कनाडा, फ्रांस, नीटरलैंड,द रशियन फेडरेशन और अमेरिका के यूआरएल से प्राप्त हो रही हैं। रिपेार्ट में इन खतरों से बचने के लिए सरकारों, निजी क्षेत्र, बाल संगठनों, स्कूलों और अभिभावकों ज्यादा महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाली भूमिका निभाने का सुझाव दिया गया है।

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