सैकड़ों गाड़ियों का सुपर चोर गिरफ्तार, करवाई थी प्लॉस्टिक सर्जरी

सैकड़ों गाड़ियों का सुपर चोर गिरफ्तार, करवाई थी प्लॉस्टिक सर्जरी

नई दिल्ली। सैकड़ों वाहन चोरी करने वाले एक शातिर बदमाश को जब पकड़े जाने का डर सताने लगा तो पुलिस से बचने के लिए उसने अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करवा ली। लेकिन इसके बावजूद वह बच नहीं सका। पुलिस ने आरोपी कुणाल को उसके साथी इरशाद अली और चोरी की गाड़ियां खरीदने वाले मो. शादाब के साथ गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से 12 गाड़ियां बरामद हुई हैं।
पूछताछ में पता चला कि प्लास्टिक सर्जरी से पहले उसका नाम तनुज था। वह गढ़ी के अमृतपुरी इलाके में रहता था। शुरु में वह घरों में चोरियां करता था, लेकिन बाद में वह वाहन चोरी करने लगा। वर्ष 2013 में वह अमर कॉलोनी में पुलिस पर गोली भी चला चुका है। इसके अलावा चितरंजन पार्क थाने के लॉकअप में वह खुदकुशी का प्रयास भी कर चुका है। वह अमर कॉलोनी का घोषित बदमाश है। इसके अलावा कोर्ट ने दो मामलों में उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने वर्ष 2012 में दिल्ली से बाहर जाकर प्लास्टिक सर्जरी करवा अपने चेहरे को बदल लिया था। लेकिन इससे ज्यादा जानकारी उसने पुलिस को नहीं दी। प्लास्टिक सर्जरी के बाद भी वह कई बार गिरफ्तार हो चुका है। दिसम्बर 2016 में वह जेल से छूटकर आया था। इसके बाद से वह होटल में ठहरता था और रात के समय वाहन चोरी करता था।
पुलिस उपायुक्त रोमिल बानिया के अनुसार बीते 13 अक्तूबर को एसआई राजेन्द्र डागर की टीम ने नेहरु प्लेस स्थित एक होटल के पास से आई-20 कार में सवार कुणाल को गिरफ्तार किया। उसके पास मौजूद गाड़ी फरीदाबाद से चोरी की गई थी।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह अब तक अपने साथी इरशाद के साथ मिलकर सैकड़ों गाड़ियां चोरी कर चुका है। चोरी की गाड़ियों को वह गाजियाबाद निवासी मो. शादाब को बेचते हैं। इस खुलासे के बाद अन्य दोनों आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इसीएम बदलकर करता था चोरी
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह चोरी के लिए सबसे पहले गाड़ी को चुनता था। इसके बाद रात के समय वह उस गाड़ी को खोलकर उसका इसीएम (इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मशीन) बदल देता था। इसके बाद नई इसीएम में अपनी चाबी लगाकर वह गाड़ी को स्टार्ट कर ले जाता था।
तीन भाग में था गिरोह
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वाहन चोरी का उसका गिरोह तीन भाग में बटा हुआ है। पहले भाग में उनका काम गाड़ी चोरी करना है। दूसरे भाग में चोरी की गाड़ी के इंजन व चेसिस नंबर को बदलकर उसके फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। तीसरे भाग में इन चोरी की गाड़ियों को कार डीलर की मदद से आम लोगों को बेचा जाता है। उन्हें यह नहीं बताया जाता कि यह चोरी की गाड़ी है।
वाहन चोरी के लिए मिलता था आर्डर
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वाहन चोरी से जुड़े लोग पहले हादसे में कबाड़ हो चुकी गाड़ी को इंश्योरेंस कंपनी से दस्तावेज सहित खरीद लेते हैं। इसी मॉडल और रंग की गाड़ी को चोरी करने का आर्डर उन्हें दिया जाता है।
चोरी के बाद इस गाड़ी पर कबाड़ हो चुकी कार का इंजन व चेसिस नंबर चढ़ा दिया जाता है। ताकि वह कबाड़ हो चुकी गाड़ी की जगह ले सके।

Share it
Top