मामूली खर्च में एम्स दूर करेगा जबड़े संबंधी विकार

मामूली खर्च में एम्स दूर करेगा जबड़े संबंधी विकार

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने जबड़ों से जुड़ी सभी तरह की विकृतियों को दूर करके चेहरे को ठीक करने की सर्जरी का लाभ आम जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। एम्स के ओरल एवं मैक्सिलोफेसियल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय रॉयचौधरी ने शनिवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि देश के अति प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान ने जबड़ों की असामान्यता और विकारों को दूर करने के लिए आर्थोजेनेटिक सर्जरी या करेक्टिव जॉ सर्जरी का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने की योजना बनायी है। इसी कड़ी में यहां रविवार से दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है जिसमें देश भर के 100 से अधिक दंत शल्य चिकित्सक शामिल होंगे। कुछ चिकित्सक नेपाल से भी आएंगे। डा. रॉय चौधरी ने बताया कि इस शल्य तकनीक में जबड़ों के आगे-पीछे, टेढ़े-मेढे होने और अन्य विसंगतियों तथा विकारों को आर्थोजेनेटिक सर्जरी या करेक्टिव जॉ सर्जरी के जरिये दूर कर दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद व्यक्ति के चेहरे की सुंदरता बढ़ जाती है। यह सर्जरी बहुत सुरक्षित और सफल है। इसमें असफलता का प्रतिशत न्यूनतम होता है। इस तकनीक के तहत व्यक्ति के जबड़े के सारे आंकड़े आदि एकत्र करके कंप्यूटर के माध्यम से वर्चुअल प्लानिंग की जाती है। इसके बाद जबड़े की थ्री डी पिंटिंग की जाती है। सभी चीजें सटीक कर लेने के बाद सर्जरी कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को दो से तीन दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है और ऑपरेशन के एक सप्ताह बाद सामान्य दिनचर्या शुरू की जा सकती है। ऑपरेशन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया करीब 45 दिन में पूरी कर ली जाती है। इस तकनीक के तहत पूरी सर्जरी मुंह के अंदर ही की जाती है और चेहरे पर किसी तरह का दाग या निशान नहीं आता है। ऑपरेशन के बाद जबड़ों को टाइटेनियम से कस दिया जाता है जिससे भविष्य में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि टीथ ब्रेसेस या डेंटल ब्रेसेस से जबड़ों में केवल पांच मिलिमीटर तक ही सुधार किया जा सकता है जबकि इस पद्धति से आवश्यकता के अनुसार इस में बदलाव किया जा सकता है। डा. रॉयचौधरी ने बताया कि 16 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति की यह सर्जरी की जा सकती है। एम्स में इस सर्जरी में मात्र 10 से 12 हजार रुपये खर्च होते हैं। निजी संस्थानों में इस सर्जरी की लागत डेढ़ लाख रुपये तक आती है। उन्होंने बताया कि एम्स में इस तरह की सर्जरी के मामले सप्ताह में तीन या चार ही आते हैं लेकिन अब इसे बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस तकनीक को देशभर को फैलाने का फैसला किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके। पांच मिनिमीटर घटाया जा सकता है इसमेें सटीक होगी।

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