चर्चित कथाकार हिमांशु जोशी नहीं रहे

चर्चित कथाकार हिमांशु जोशी नहीं रहे

नयी दिल्ली। सातवें दशक के चर्चित कथाकार एवं जाने-माने पत्रकार हिमांशु जोशी का गुरुवार रात लंबी बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन पुत्र हैं।

उत्तराखंड में चंपावत जिले के ज्योस्यूडा गांव में चार मई 1935 को जन्मे श्री जोशी ने 'कगार की आग', 'छाया मत छूना मन तथा 'तुम्हारे लिये' जैसे उपन्यासों से ङ्क्षहदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी थी और वह अपने लेखन से काफी लोकप्रिय हुए।

श्री जोशी का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर आज अपराह्न किया गया, जिसमें प्रसिद्ध लेखक पंकज बिष्ट, हरिसुमन बिष्ट और प्रसिद्ध व्यंगकार प्रदीप पंत समेत कई लेखक एवं पत्रकार मौजूद थे। उन्होंने श्री जोशी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार व न्यू मीडिया विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह ने भी श्री जोशी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

वर्ष 1956 में पत्रकारिता से अपने करियर की शुरूआत करने वाले श्री जोशी 1968 से 1971 तक 'कादंबनी' में और 1971 से 1993 तक 'साप्ताहिक हिदुस्तान' में काम करते रहे। उनकी चर्चित कृतियों में 'महासागर', 'समय साक्षी है', 'सुराज' और 'अरण्य' भी शामिल है। इसके अलावा 'गंधर्व गाथा', 'जलते हुए डैने' तथा 'मनुष्य चिह्न' जैसे उनके कहानी संग्रह भी काफी चर्चा में रहे। उन्होंने अमर शहीद अशफाकउल्लाह खां की जीवनी भी लिखी थी।

उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें हिंदी अकादमी का गोविंद वल्लभ पंत सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पुरस्कार तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार शामिल है। उनकी चर्चित कीर्ति 'तुम्हारे लिये' पर दूरदर्शन धारावाहिक और 'सुराज' उपन्यास पर फिल्म बनी थी। इसके अलावा 'तर्पण' और 'सूरज की ओर' पर टेलीफिल्में बनीं थीं। चर्चित कथाकार हिमांशु जोशी नहीं रहे

नयी दिल्ली। सातवें दशक के चर्चित कथाकार एवं जाने-माने पत्रकार हिमांशु जोशी का गुरुवार रात लंबी बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन पुत्र हैं।

उत्तराखंड में चंपावत जिले के ज्योस्यूडा गांव में चार मई 1935 को जन्मे श्री जोशी ने 'कगार की आग', 'छाया मत छूना' मन तथा 'तुम्हारे लिये' जैसे उपन्यासों से ङ्क्षहदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी थी और वह अपने लेखन से काफी लोकप्रिय हुए।

श्री जोशी का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर आज अपराह्न किया गया, जिसमें प्रसिद्ध लेखक पंकज बिष्ट, हरिसुमन बिष्ट और प्रसिद्ध व्यंगकार प्रदीप पंत समेत कई लेखक एवं पत्रकार मौजूद थे। उन्होंने श्री जोशी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार व न्यू मीडिया विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह ने भी श्री जोशी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

वर्ष 1956 में पत्रकारिता से अपने करियर की शुरूआत करने वाले श्री जोशी 1968 से 1971 तक 'कादंबनी' में और 1971 से 1993 तक 'साप्ताहिक ङ्क्षहदुस्तान' में काम करते रहे। उनकी चर्चित कृतियों में 'महासागर', 'समय साक्षी है', 'सुराज' और 'अरण्य' भी शामिल है। इसके अलावा 'गंधर्व गाथा', 'जलते हुए डैने' तथा 'मनुष्य चिह्न' जैसे उनके कहानी संग्रह भी काफी चर्चा में रहे। उन्होंने अमर शहीद अशफाकउल्लाह खां की जीवनी भी लिखी थी।

उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें हिंदी अकादमी का गोविंद वल्लभ पंत सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पुरस्कार तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार शामिल है। उनकी चर्चित कीर्ति 'तुम्हारे लिये' पर दूरदर्शन धारावाहिक और 'सुराज' उपन्यास पर फिल्म बनी थी। इसके अलावा 'तर्पण' और 'सूरज की ओर' पर टेलीफिल्में बनीं थीं। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

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