भीख मांगिए, लेकिन निवेशकों के पैसे लौटाओः हाईकोर्ट

भीख मांगिए, लेकिन निवेशकों के पैसे लौटाओः हाईकोर्ट


मुंबई। निवेशकों और मकान खरीदनेवालों की रकम वापस लौटाने के लिए जरूरत पड़ी तो बिल्डर डीएसके को चाहे भीख ही क्यों न मांगनी पड़े, लेकिन कोर्ट उन्हें अब और राहत नहीं दे सकती। उन्हें कोर्ट में रकम जमा करानी ही होगी। बंबई हाईकोर्ट ने सोमवार को डीएसके की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिल्डर को फटकार लगाई। कोर्ट ने बिल्डर को 50 करोड़ रुपए अदालत के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन कोर्ट की मोहलत समाप्त होने के बाद भी डीएस कुलकर्णी ने रकम जमा नहीं कराया। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने डीएसके को अगली सुनवाई के दौरान खुद अदालत में पेश होने का आदेश सुनाया है। कोर्ट ने एमपीआईडी ऐक्ट के तहत जांच अधिकारियों से रिपोर्ट भी तलब की है।
डीएसके के खिलाफ अब तक जांच कहां तक पहुंची है, इसकी डिटेल अदालत के समक्ष रखने का स्पष्ट निर्देश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया है। डीएसके के वकीलों ने बताया कि प्रभुणे ने अब तक डीएसके के बैंक खाते में रकम नहीं जमा कराया है। अंतरराष्ट्रीय बैंक ने जो कागजात मांगे थे, वह भी पूर्ण नहीं थे, जिसके कारण विदेशों से यह रकम जमा नहीं हो सकी है। यह बात अरविंद प्रभुणे ने हाईकोर्ट में उपस्थित रहकर कहा। इस दौरान डीएसके के वकीलों ने नीलामी के लिए चार संपत्तियों का ब्यौरा अदालत के समक्ष रखा, लेकिन सरकारी वकील ने कहा कि इस संपत्तियों को बेचने के बाद भी निवेशकों को रकम नहीं लौटाई जा सकेगी।
सरकारी कीमत के अनुसार इन संपत्तियों की कुल कीमत 328 करोड़ रुपए आंकी गई है, जबकि निवेशकों को 600 करोड़ से ज्यादा की रकम लौटाई जानी है। कोर्ट ने डीएसके मामले में राज्य सरकार की भूमिका को लेकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार केवल कानूनी घोड़ा दौड़ा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार डीएसके के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, तो यह उसके लिए ही खेदजनक बात है। राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि डीएसके मामले में सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

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