किसान कर्ज माफी और जीएसटी से राज्‍यों का राजकोषीय घाटा बढ़ा : आरबीआई

किसान कर्ज माफी और जीएसटी से राज्‍यों का राजकोषीय घाटा बढ़ा : आरबीआई



मुंबई। सकल राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर राज्‍यों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रिपोर्ट के अनुसार वित्‍त वर्ष 2017-18 में राज्‍यों का सकल राजकोषीय घाटा लक्ष्‍य से 0.35 फीसदी अधिक रहा है। राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों की कर्ज माफी, जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों की आय में भारी कमी आई है। राजस्‍व में आई कमी के कारण घाटा लगातार बढ़ रहा है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए राज्‍यों का सकल राजकोषीय घाटे का लक्ष्‍य जीडीपी का 3.1 फीसदी दर्ज हुआ था। यह लगातार तीसरा साल है जब राज्‍य अपने सकल राजकोषीय घाटे के लक्ष्‍य को पाने में असफल रहे हैं। ऐसा तब हो रहा है जब केंद्र की ओर से राज्‍यों को टैक्‍स में से ज्‍यादा हिस्‍सा दिया जा रहा है।
रिजर्व बैंक ने स्‍टेट फाइनेंसेज बेस्‍ड ऑन स्‍टेट बजट को लेकर एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार किया है। आरबीआई की इस स्‍टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्‍तर पर किसान कर्ज माफी से राज्यों के राजकोषीय घाटा बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार को राजस्व प्राप्ति के मुकाबले राजस्व खर्च अधिक होने की वजह से वित्तीय वर्ष 2028-19 में राजस्व घाटा 4,511 करोड़ से करीब तीन गुना बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये हो गया है। साल 2015-16 में राजस्व घाटा 318.3 बिलियन था, जबकि साल 2016-17 में यह बढ़कर 379.5 बिलियन हो गया।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल गुजरात का राजस्व घाटा 24,610 करोड़ रुपये दर्ज हुआ है, जबकि मध्यप्रदेश का राजस्व घाटा भी इस दौरान बढ़कर 249.1 बिलियन हो गया है। पिछले साल पंजाब का राजकोषीय घाटा 130.9 बिलियन, राजस्थान का 431.5 बिलियन, तमिलनाडु का 405.3 बिलियन, उत्तर प्रदेश का 499.6 बिलियन और पश्चिम बंगाल का 193.6 बिलियन हो गया है।
रिजर्व बैंक ने स्टडी रिपोर्ट में किसान कर्ज माफी और जीएसटी को ही राजस्व घाटे के लिए जिम्मेदार ठहराया है। किसानों की कर्ज माफी पर चिंता जताते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कर्ज माफी से खेती की उत्‍पादकता बढ़ी है, इसका कोई रिकॉर्ड सरकारों के पास नहीं है। इसके अलावा स्‍टडी से पता चलता है कि किसान की कर्ज माफी की वजह से किसान कर्ज के लिए बैंकों की बजाए असंगठित क्षेत्र की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी है। राज्‍यों में किसानों की कर्ज माफी 2014 में आंध्र प्रदेश में शुरू हुई थी| उसके बाद तमिलनाडु, महाराष्‍ट्र, उत्‍तर प्रदेश, पंजाब और अब कर्नाटक ने भी कर्ज माफ किया है।
रिजर्व बैंक के मुताबिक जिन राज्‍यों ने अपने यहां किसानों का कर्ज माफ किया है वहां पूंजीगत खर्च में कमी आई है। कर्जमाफी की कीमत राज्‍यों को विकास के मोर्चे पर चुकानी पड़ी है| विकास से जुड़े काम के लिए उन्‍होंने कम पैसा खर्च किया।रिजर्व बैंक की ओर से दावा किया गया है कि अब जीएसटी स्थिर हो रहा है। भविष्य में जीएसटी से राज्‍यों का राजस्‍व बढ़ेगा और राजकोषीय मोर्चे पर भी मजबूती आएगी।

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