इस्पात कंपनियों की नीलामी से बढ़ सकती है अनुचित प्रतिस्पर्धा

इस्पात कंपनियों की नीलामी से बढ़ सकती है अनुचित प्रतिस्पर्धा

नयी दिल्ली। बैंक्रप्सी एवं इन्सोल्वेंसी संहिता (आईबीसी) कानून के तहत भूषण स्टील, भूषण स्टील एण्ड पावर और मोनेट इस्पात जैसी कंपनियों पर दिवालियपन की कार्रवाई से इस्पात क्षेत्र में अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने की आशंका जतायी जा रही है। उल्लेखनीय है कि दिवालियापन की शिकार इन तीनों कंपनियों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और इसके लिए टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियों के आगे आने की संभावना जतायी जा रही है। इस क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि यदि इन दोनों कंपनियां बोली लगाने में सफल रहती है तो प्रतिस्पर्धा का मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में पहुंच सकता है क्योंकि इससे इस उद्योग में अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़वा मिल सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि दिवालियेपन की कार्रवाई का सामना कर रही तीनों कंपनियां तकरीबन पांच करोड़ टन सलाना उत्पादन क्षमता के साथ देश के स्टील उत्पादन में 15 फीसदी योगदान देती हैं। तीनों स्टील कंपनियों के लिए बोली लगाने वाली कंपनियां टाटा स्टील लिमिटेड (फ्लैट स्टील क्षमता 85 लाख टन सालाना) और जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड (फ्लैट स्टील क्षमता 1.2 करोड़ टन सालाना)है।
विश्लेषकों का कहना है कि स्टील उद्योग में होने वाले इस अधिग्रहण के परिणामस्वरूप कार्टलाइ•ोशन की संभावना बढ़ गयी है। नियमों के अनुसार बोली को अंतिम अनुमोदन देने से पहले आयोग से मंजूरी ली जानी चाहिए। हालांकिजानकारों का कहना है कि कई बड़ी घरेलू स्टील कंपनियां दिवाएलिएपन के मामले में आयोग से अनुमोदन से छूट की मांग कर रही है। ऐसे में दिवालिएपन के प्रावधान के तहत मर्जर और अधिग्रहण के सभी मामलों के लिए बोलीदाता को सीसीआई तथा समझौते को मंजूरी देने वाली लेनदेन समिति से अनुमोदन लेना होगा।

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