एयर इंडिया के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत

एयर इंडिया के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत

नई दिल्ली। सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया के खिलाफ इस साल जून में भी सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज की गयीं जबकि देश के चार प्रमुख महानगरों शहरों के हवाई अड्डों पर समय पर उड़ान भरने के मामले में उसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। नागर विमानन महानिदेशालय के आँकड़ों के अनुसार, घरेलू मार्गों पर एयर इंडिया के खिलाफ प्रति एक लाख यात्री 16 शिकायतें आयी हैं। इस मामले में प्रति एक लाख यात्री 13 शिकायतों के साथ दूसरे नंबर पर जेट एयरवेज और जेट लाइट रही। प्रति एक लाख यात्री गो एयर के खिलाफ आठ शिकायतें, ट्रूजेट के खिलाफ सात, स्पाइसजेट के खिलाफ पाँच और एयर एशिया के खिलाफ तीन शिकायतें आयी हैं। शिकायतों के निपटारे के मामले में भी एयर इंडिया सबसे फिसड्डी रही। उसके खिलाफ आयी 196 शिकायतों में 119 का निपटारा किया गया जबकि 77 शिकायतें अभी भी विचाराधीन रह गयीं। जेट एयरवेज और जेट लाइट के खिलाफ आयी 217 शिकायतों में से 213 का निपटारा किया गया जबकि चार विचाराधीन रह गयीं। यात्रियों की सबसे ज्यादा (32.8 प्रतिशत) शिकायत उड़ान संबंधी समस्याओं को लेकर रही। इसके बाद 28.7 प्रतिशत शिकायतें ग्राहक सेवा को लेकर तथा 16.6 प्रतिशत बैगेज संबंधी रहीं। वहीं, 7.8 प्रतिशत शिकायत कर्मचारियों के व्यवहार के संबंध में आयीं।
देश के चार प्रमुख महानगरों में समय की पाबंदी के मामले में किफायती विमान सेवा कंपनी इंडिगो 86.1 प्रतिशत ओटीपी (ऑनटाइम परफॉर्मेंस) के साथ सबसे आगे रही। नवोदित एयरलाइन विस्तारा 80.8 प्रतिशत के साथ दूसरे, स्पाइसजेट 79.8 प्रतिशत के साथ तीसरे और गो एयर 75.9 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रही। एयर इंडिया 69.9 प्रतिशत के साथ ओटीपी के मामले में आखिरी पायदान पर रही। जून में सबसे ज्यादा 15.94 प्रतिशत उड़ानें जूम एयर की रद्द हुईं जबकि ट्रूजेट की 9.29 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी एयरलाइंस में सर्वाधिक 1.62 प्रतिशत उड़ानें एयर इंडिया की रद्द हुईं। स्पाइसजेट की 0.28 प्रतिशत और गो एयर की 0.27 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं। इस मामले में विस्तारा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। उसकी शून्य प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं। इसके बाद क्रमश: एयर एशिया, जेट लाइट और जेट एयरवेज का स्थान रहा। उड़ानें रद्द होने की सबसे बड़ी वजह विविध बतायी गयी है। 77 प्रतिशत रद्द उड़ानों के पीछे यही वजह रही। इसके अलावा तकनीकी कारणों से 19.8 प्रतिशत तथा खराब मौसम के कारण 2.6 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं।

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