विनिर्माण क्षेत्र में सबसे कम वेतन

विनिर्माण क्षेत्र में सबसे कम वेतन

नई दिल्ली। देश के विनिर्माण क्षेत्र में वर्ष 2016 में वेतन में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी तथा यह सबसे कम वेतन वाला क्षेत्र रहा। यह बात ऑनलाइन कॅरियर समाधान प्रदाता मॉन्स्टर इंडिया की रिपोर्ट में कही गयी है। विनिर्माण क्षेत्र में दिया जाने वाला औसत सकल वेतन प्रति घंटा पिछले साल घटकर केवल 211.70 रुपये रह गया। वर्ष 2015 में यह 252.10 रुपये था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस दर से इस सेक्टर में वेतन घट रहे हैं, उससे उद्योग में प्रवेश करने वाली नई प्रतिभाओं के सामने समस्याएं आ सकती हैं। इसमें बताया गया है कि विनिर्माण क्षेत्र में केवल माध्यमिक शिक्षा पूरी करके काम पर लगे कर्मचारी 101.40 रुपये प्रति घंटा कमाते हैं, जबकि स्नातकोत्तर डिग्री वाले 270.80 रुपये प्रति घंटा कमाते हैं। इस सेक्टर में पुरुष कर्मचारी औसतन 256.60 रुपये प्रति घंटा पाते हैं जबकि महिला कर्मचारी औसतन 179.80 रुपये प्रति घंटा कमाती हैं। इस प्रकार लिंग के आधार पर वेतन में 29.90 प्रतिशत की असमानता है। इसके अलावा पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से विदेशी स्वामित्व की कंपनियाँ घरेलू कंपनियों के मुकाबले दुगुना से अधिक वेतन देती हैं। उनके द्वारा दिया जाने वाला औसत सकल प्रति घंटा वेतन 349.70 रुपये है। मॉन्स्टर के एशिया प्रशांत एवं मध्यपूर्व के प्रबंध निदेशक संजय मोदी ने कहा, विनिर्माण क्षेत्र एक परिपक्व अर्थव्यवस्था का आधार है। यह वृद्धि, उत्पादकता, रोजगार को गति देता है एवं कृषि तथा सेवा क्षेत्रों को मजबूत करता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में यह लगभग 16 प्रतिशत का योगदान देता है और इसमें लगभग 12 से 13 प्रतिशत श्रमबल काम करता है। इसके बावजूद इस सेक्टर में सबसे कम वेतन दिया जाता है। सबसे कम वेतन होने के बावजूद विनिर्माण में लगे कर्मचारियों की वेतन से संतुष्टि का स्तर 50.8 प्रतिशत से बढ़कर 53.5 प्रतिशत पर पहुँच गया है। अन्य क्षेत्रों में सर्वाधिक औसत सकल प्रतिघंटा वेतन बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा सेक्टर में देखा गया, जिनमें वेतन 433 रुपये प्रति घंटे रहा। इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में 386.80 रुपये, स्वास्थ्य, देखभाल सेवाओं और सामाजिक सेवा के कार्य में 242.50 रुपये प्रति घंटा औसत वेतन दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में औसत सकल प्रति घंटा वेतन 204.10 रुपये था।

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