छोटे हवाई अड्डों के लिए आयात होंगे सचल एटीसी टावर

छोटे हवाई अड्डों के लिए आयात होंगे सचल एटीसी टावर

नयी दिल्ली। सस्ती हवाई यात्री वाली सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना 'उड़ान'के तहत विकसित किये जाने वाले हवाई अड्डों पर सचल एटीसी टावर लगाये जायेंगे जिन्हें आयात करने की योजना बन चुकी है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष गुरुप्रसाद महापात्रा ने यूनीवार्ता को बताया कि पहले चरण के लिए आवंटित रूटों के हवाई अड्डों पर पहले से एटीसी टावर मौजूद हैं, लेकिन दूसरे चरण में कुछ ऐसे हवाई अड्डों के प्रस्ताव मिल सकते हैं जहाँ फिलहाल एटीसी टावर नहीं हैं। इनके लिए प्राधिकरण सचल एटीसी टावर खरीदेगा। सचल टावर की खासियत यह होगी कि जरूरत पडऩे पर उसे एक हवाई अड्डे से दूसरे हवाई अड्डे पर आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा। सैन्य हवाई अड्डों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के हवाई अड्डों पर एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) का काम पूरी तरह से एएआई के अंदर आता है। श्री महापात्रा ने बताया कि पहले चरण में 10 सचल एटीसी टावर खरीदने की योजना है। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी किये जायेंगे। एक टावर की कीमत छह से सात करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है। सीधी खरीद करने से ये महँगे मिलते इसलिए टेंडर जारी किये जायेंगे। ये टावर भारत में नहीं बनते जिससे आयात करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।'उड़ान'के दूसरे चरण में परिचालन शुरू होने से पहले इन टावरों की खरीद प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। स्थायी टावर की बजाय सचल एटीसी टावर लगाने का कारण पूछे जाने पर श्री महापात्रा ने कहा कि'उड़ान'के तहत कौन सा रूट कितना सफल होगा यह कहना मुश्किल है। यदि किसी रूट पर एयरलाइन को लगेगा कि वह मुनाफा नहीं कमा पा रही है और यात्रियों की संख्या काफी कम है तो उस हवाई अड्डे पर परिचालन बंद करने की नौबत भी आ सकती है। ऐसे में सचल टावर को एक हवाई अड्डे से हटाकर दूसरे हवाई अड्डे पर लगाना संभव होगा। उन्होंने कहा कि पहले भी देश में इस तरह के टावरों का इस्तेमाल हो चुका है, लेकिन पहले खरीदे गये टावर काफी पुराने पड़ चुके हैं और आधुनिक तकनीकों से मेल नहीं खाते। इसलिए, नये टावर खरीदने की जरूरत पड़ रही है।
उड़ान के पहले चरण में 30 मार्च को पाँच विमान सेवा कंपनियों को 128 रूटों का आवंटन किया गया था। इसमें 33 ऐसे हवाई अड्डे शामिल हैं जहाँ से'उड़ान'से पहले वाणिज्यिक विमान सेवा बिल्कुल नहीं थी। इन रूटों पर एयरलाइंस को छह महीने के अंदर विमानों का परिचालन शुरू करना है। दूसरे चरण के लिए नये नियमों तथा शर्तों की घोषणा जुलाई के अंत तक होने की उम्मीद है।

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