काजू आयात पर शुल्क बढाया जाये: परिषद

काजू आयात पर शुल्क बढाया जाये: परिषद

नई दिल्ली। भारतीय काजू निर्यात प्रोत्साहन परिषद ने काजू व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए इस पर आयात शुल्क 45 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष डॉ आर. के. भूदेस ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि विदेश खासकर वियतनाम से आयात किया जा रहा टुकड़ा काजू भारतीय काजू व्यवसाय पर विपरीत असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि वियतनाम से करीब 10 हजार टन टुकड़ा काजू प्रति वर्ष आयात किया जाता है जिसका अधिकतर उपयोग मिठाइयों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि इस पर आयात शुल्क बढ़ा दिया जाये तो भारत में काजू के उत्पादन और इससे जुड़े व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढऩे के साथ ही निर्यात से विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी होगी। डॉ भूदेस ने बताया कि काजू व्यवसाय में 10 लाख श्रमिक रोजगार पा रहे हैं जिनमें 90 फीसदी महिलायें हैं। रोजगार खासकर महिलाओं के लिए आय के साधन बढ़ाने के मद्देजर इस कारोबार को बढ़ावा देने की खास जरूरत है। इससे जुड़ी प्रौद्योगिकी को आधुनिक बनाने और इसे अन्य तरीकों से भी प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि काजू व्यवसाय से देश को हर वर्ष छह हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। भारत काजू का सबसे बड़ा उत्पादक, संशोधक और उपभोक्ता है। परिषद ने भारतीय काजू की ब्रांडिंग और विशेष प्रचार-प्रसार की योजना बनायी है। उन्होंने बताया कि भारतीय काजू अपनी अच्छी गुणवत्ता और स्वाद की वजह से दुनिया भर में मशहूर है जो करीब 70 देशों को निर्यात किया जाता है। इसी सिलसिले में यहां बुधवार से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन सह प्रदर्शनी 'काजू इंडिया 2019' आयोजित की जा रही है जिसमें करीब 75 विदेशी प्रतिनिधिमंडल और 800 भारतीय काजू कारोबारी और निर्यातकों के शामिल होने की उम्मीद है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु करेंगे। डॉ भूदेस ने बताया कि भारतीय काजू निर्यात 100 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है जिसके उपलक्ष्य में साल भर तक समारोह आयोजित किये जायेंगे।

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