जहां कोई नहीं जाता, वहां पहुंचता है सीपीडब्ल्यूडी

जहां कोई नहीं जाता, वहां पहुंचता है सीपीडब्ल्यूडी

नई दिल्ली। सरकारी उपक्रम केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के महानिदेशक प्रभाकर सिंह ने कहा है कि दुर्गम और खतरों से भरे जिन इलाकों में कोई नहीं जाता, वहां सीपीडब्ल्यूडी निर्माण कार्य करता है।
श्री सिंह ने सीपीडब्ल्यूडी के 164 वें स्थापना दिवस पर आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकारी उपक्रम होने के नाते सीपीडब्ल्यूडी को सरकार के निर्देशों और नीति के अनुुरुप काम पड़ता है। इसलिए सीपीडब्ल्यूडी के कर्मचारी, इंजीनियर और वास्तुविद् उन इलाकों में जाते हैं जहां अन्य कंपनियां निर्माण कार्य करने से मना कर देती है। ऐसे इलाकों में जान का खतरा होता है। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात और दुर्गम तथा खतरों से भरे क्षेत्रों में सीपीडब्ल्यूडी निर्माण कार्य करता है।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और चीन के साथ सटी सीमाओं पर दुर्गम इलाकों में सड़क तथा अन्य निर्माण कार्य सीपीडब्ल्यूडी करता है। इन इलाकों में साल में केवल चार महीने ही काम होता है। सीमा के इलाके सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण होते हैं और ये संवेदनशील होते हैं। हालांकि उन्होंने इन इलाकों में निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी देने से इंकार कर दिया।
श्री सिंह ने विदेशों में निर्माण कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सूडान में सरकार की अस्पताल बनाने की वचनबद्धता सीपीडब्ल्यूडी पूरा कर रहा है। हिंसाग्रस्त सूडान में सीपीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और वास्तुविद् काम कर रहे हैं। इसी तरह से आतंक के बीच सीपीडब्ल्यूडी ने अफगानिस्तान में संसद भवन का निर्माण कार्य किया है।
एक सवाल के जवाब में सीपीडब्ल्यूडी महानिदेशक ने कहा कि निर्माण कार्य में नयी तकनीक लाने में संस्थान अग्रणी रहा है। नयी दिल्ली की सरकारी कॉलानियों के पुनर्निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे पेड़ों को काटने की नौबत नहीं आएगी। कॉलोनियों का डिजायन फिर से तैयार किया जा रहा है जिसमें पेड़ों को बचाकर निर्माण किया जाएगा। हालांकि कुछ पेड़ों को दूसरे जगह स्थानांतरित किया जा सकता है। कॉलोनियों में पेड़ों को बचाने के लिये भूमिगत पार्किग नहीं बनायी जाएगी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों के नये डिजायन में मकानों की संख्या में कुछ कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी का निर्माण कार्य पर्यावरण के अनुकूल, तकनीक रुप से उन्नत, किफायती, ऊर्जा कुशल तथा टिकाऊ होता है। फिलहाल सीपीडब्ल्यूडी के 31,500 करोड़ रुपए के लगभग 1900 निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा 600 करोड़ रुपए से अधिक के 1450 रखरखाव कार्य हैं। हाल में संस्थान को 10 हजार करोड़ रुपए के नये निर्माण कार्य सौंपे गये हैं।

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