650 वर्षों से गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन कर रहा सिद्धपीठ हथियाराम मठ

650 वर्षों से गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन कर रहा सिद्धपीठ हथियाराम मठ


गाजीपुर, 14 जुलाई (ही.स.)। अध्यात्म जगत में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित सिद्धपीठ हथियाराम मठ सौ पचास नहीं बल्कि 650 वर्षों से गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है।

देश के हरिद्वार, इंदौर, काशी सहित तमाम स्थानों पर स्थापित इसकी शाखाओं का प्रमुख उद्देश्य इस परंपरा में मजबूती लाना है। तमाम धार्मिक सामाजिक अनुष्ठान के साथ ही इस पीठ ने अभी तक अपनी इस मजबूत थाती को बचा कर रखे हुआ है। जहांं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देश के कोने कोने में सिद्ध पीठ से जुड़े छह श्रद्धालुओं का हुजूम अपने गुरुजनों को पूजन नमन अर्चन करने सिद्ध पीठ पर उमड़ता है।

इस दौरान जहां आमजन अपने गुरु सिद्धपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर का पूजन अर्चन कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं वही पीठाधीश्वर महाराज द्वारा ब्रह्मलीन गुरुजनों के समाधि स्थल पर पूजन अर्चन कर आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। लगभग 650 वर्ष पूर्व बेसो नदी के किनारे घनघोर जंगल में तपस्या कर रहे विशालकाय शरीर वाले संत जो लोगों को कभी-कभी हाथी के रूप में भी दर्शन देते थे ऐसे हाथी वाला बाबा के नाम से गांव का नाम हथियाराम पड़ा। वहीं संत मुरार नाथ महाराज सिद्धपीठ के संस्थापक बने, जिनके द्वारा स्थापना के बाद यह पीठ निरंतर अध्यात्म व सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में एक मिसाल स्थापित करता नजर आया।

सिद्धपीठ के 26 में पीठाधिपति के रूप में महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज आज इस सिद्धपीठ का नेतृत्व कर रहे हैं। सिद्धपीठ के महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूना अखाड़े में आज इस धरती से स्वामी महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति, महामंडलेश्वर सोमेश्वर यति, महामंडलेश्वर परेशानन्द यति, महामंडलेश्वर मोहनानंद यति के साथ ही आधा दर्जन से अधिक महामंडलेश्वर हैं। वहीं सिद्ध पीठ के 25 में महंत ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति जी महाराज के तप बल से समूचा अध्यात्म जगत आज भी उनको नमन करता नजर आता है।

गौरतलब है कि गत दिनों देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोम भाई मोदी भी सपरिवार इस पीठ को नमन करने यहां पहुंचे। वहीं महज एक पखवारे पूर्व ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने भी सिद्धपीठ के गुरुकुल में अध्ययनरत वैदिक बटुक के ज्ञान की प्रशंसा करते नहीं अघाये। यहां सिद्धपीठ परिसर में स्थित वृद्धाअंबिका देवी (बुढ़िया माई), सिद्धेश्वरी माता व सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में वर्ष पर्यंत श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। वही समय समय पर तमाम धार्मिक अनुष्ठान भी संपादित होते हैं जिसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से लोगों का आना जाना लगा रहता है।

सिद्धपीठ पर धूमधाम के साथ मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा

जनपद के सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मंगलवार को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। जानकारी देते हुए सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन शाम को चंद्र ग्रहण लग रहा है, इसलिए अबकी गुरु पूर्णिमा पूजा का विशेष महत्व हो जाएगा।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लग रहे चंद्र ग्रहण पर सूतक के असर से बचने के लिए शाम 4:00 बजे से पूर्व ही सभी पूजन, प्रसाद वितरण व भंडारा कार्य संपन्न करा लिया जाएगा।

जानकारी देते हुए श्री यति जी महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व सिद्धपीठ पर परंपरानुसार 16 जुलाई मंगलवार को हजारों शिष्य श्रद्धालुओं के मध्य गुरु पूजा करके मनाई जाएगी।

इस अवसर पर श्री यति जी द्वारा अपने गुरु जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर सिद्धपीठ के 25 वें पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन स्वामी बालकृष्ण यति जी महाराज का पूजा कर गुरु का आशीर्वाद लिया जाएगा। इसके साथ ही सिद्धपीठ के सभी ब्रह्मलीन गुरुजनों की समाधि स्थल पर पूजा अर्चन किया जाएगा। इस अवसर पर सिद्धपीठ से जुड़े देश के कोने-कोने से शिष्य श्रद्धालुओं का हुजूम मठ पर गुरु पूजन के निमित्त उमड़ेगा।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिसके चलते शाम 4:00 बजे से सूतक लग जाएगा। सिद्धपीठ पर गुरु पूजन का कार्य प्रातः 9:00 बजे प्रारंभ होकर पूजन के साथ 12:00 बजे तक प्रसाद वितरण कार्य के पश्चात महाभंडारे का आयोजन किया गया है। उपरोक्त सभी कार्य संपन्न करते हुए शाम 4:00 बजे भगवान का आरती पूजन कर मंदिर के कपाट अगले दिन 4:00 बजे तक के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण सदी का सबसे लंबे

गुरु पूर्णिमा को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण के संबंध में विशेष जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई 2019 को है, यह भारत में दिखाई देगा। इसका समय 16 जुलाई की देर रात यानी रात 01:31 से सुबह 04:31 तक रहेगा। इस बार गुरु पूर्णिमा पर्व वाले दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। गुरु पूर्णिमा पर यह लगातार दूसरे साल चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्र ग्रहण था। क्योंकि ग्रहण से पहले सूतक लग जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा के कार्यक्रम सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। मध्य रात्रि को घटित होने वाला चंद्रग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण है तथा 21वीं सदी का सबसे देर तक चलने वाला चंद्रग्रहण है। सामान्यतः ग्रहण एक या डेढ़ घंटे की होती है, परन्तु यह चंद्रग्रहण 4 घंटे तक रहेगा।

उन्होंने बताया कि किसी भी ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारम्भ हो जाता है। सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए ज्यादा देर तक नही सोये और नही ज्यादा देर तक बैठना चाहिए। धार्मिक पुस्तक पढ़ना चाहिए। ज्यादा गुस्सा तथा नकारात्मक विचार से दूर रहे।

- चंद्र ग्रहण पर क्या करें

श्री यति जी महाराज द्वारा बताया गया कि चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान नाम जप, स्नान, दान व हवन से मानव का कल्याण संभव है। उन्होंने बताया कि साल भर श्रद्धालुओं द्वारा किए गए पूजन कार्य का फल ग्रहण के दौरान किए गए भगवान नाम जप, स्नान, दान व हवन से प्राप्त हो जाता है। चंद्र ग्रहण के असर से बचने के लिए गर्भवती स्त्रियों को अपने पास कुशा रखना चाहिए। कुशा का इतना अधिक महत्व है कि इसे हमें अपने घर में पूजन सामग्री अनाज वह तमाम महत्वपूर्ण स्थानों पर रखना चाहिए जिससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है। ग्रहण काल में मन तथा बुद्धि पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचने के लिए जप, ध्यानादि करना चाहिए।

- चंद्र ग्रहण पर क्या न करें

ग्रहणकाल में भोजन करना निषेध है उस समय घर में रखा हुआ खाना या पेय पदार्थ पुनः उपयोग करने लायक नहीं होता है। ग्रहण या सूतक से पहले ही यदि सभी भोज्य पदार्थ यथा दूध दही चटनी आचार आदि में कुश या तुलसी का पत्ता रख देते है तो यह भोजन दूषित नहीं होता है और आप पुनः इसको उपयोग में ला सकते है। सूतक एवं ग्रहण काल में झूठ, कपट आदि कुविचारों से परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में व्यक्ति को मूर्ति स्पर्श, नाख़ून काटना, बाल काटना अथवा कटवाना, निद्रा आदि कार्य नहीं करना चाहिए। इस समय बच्चे, वृद्ध,गर्भवती महिला, एवं रोगी को यथानुकूल खाना अथवा दवा लेने में कोई दोष नहीं लगता है। ग्रहण काल में शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाये रखना चाहिए मन-माने आचरण करने से मानसिक तथा बौद्धिक विकार के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी क्षय होता है। ग्रहणकाल में मन, वचन तथा कर्म से सावधान रहना चाहिए।


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