जानिए भाग्यांक 1 की प्रमुख विशेषताएं

जानिए भाग्यांक 1 की प्रमुख विशेषताएं


मूलांक और भाग्यांक हमारे जीवन में बड़ा महत्व रखते हैं। कई बार हमें जन्म का समय या स्थान मालूम नहीं होता। ऐसे में कुंडली बना पाना कठिन हो जाता है। मूलांक उन लोगों के लिए एक सटीक आधार है। भाग्यांक की गणना थोड़ी विस्तृत होती है। यह वह अंक होता है जो आपके जीवन में बार-बार किसी न किसी तरह आता ही है और आपको अच्छे या बुरे रूप में प्रभावित करता है। भाग्यांक का उपयोग महत्वपूर्ण घटनाओं का समय या तिथि जानने के लिए किया जाता है। आजकल जो नाम का अक्षर बदलने का चलन चल रहा है, वह भी भाग्यांक के ही आधार पर किया जाता है।

-भाग्यांक 1 की प्रमुख विशेषताएं

जन्म दिनांक के सम्पूर्ण अंकों के जोड़ को संयुक्तांक अथवा भाग्यांक कहते हैं। इसमें तारीख, माह एवं सन् सभी को एक साथ जोड़ देते हैं। जैसे 15.08.1947 का योग 1+5+0+8+1+9+4+7 =35 =3+5 =8। यह 8 का अंक ही भाग्यांक या संयुक्तांक होता है। भाग्यांक 1 से लेकर 9 तक जन्मे व्यक्तियों पर भाग्यांक का क्या प्रभाव रहेगा यह नीचे दिया जा रहा है:

भाग्यांक 1: सूर्य

भाग्यांक 1 का अधिष्ठाता सूर्य ग्रह को माना गया है। इसके प्रभाव से ऐसे जातक जिनका भाग्यांक 1 होता है वे अपने कार्यक्षेत्र में एक चतुर, बलवान, बुद्धिमान, राजसी ठाट-बाट को पसन्द करने वाले स्पष्ट वक्ता होते हैं। ये स्वभाव से गम्भीर, उदार हृदय, परोपकारी, सत्य के मार्ग पर चलने वाले, यशस्वी तथा विरोधियों को परास्त करने में विश्वास रखने वाले शूरवीर व्यक्ति के रूप में पहचान स्थापित करते हैं। इनका जीवन चक्र एक राजा की भाँति संचालित होता है अर्थात् यह हुकूमत पसन्द, स्वतंत्र तथा स्थिर विचारधारा पर निर्भीक चलते हैं। अहं या स्वाभिमान इनमें कूट-कूट कर भरा होता है। इनकी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति इनकी मेहनत से होती है। इनके अधिकारों में समयानुसार वृद्धि होती रहती है। सूर्य अग्नि तत्व का द्योतक होने से इनका तेज समाज के विभिन्न क्षे़त्रों में व्याप्त होता है तथा इनकी जीवनी शक्ति अच्छी रहने से ये दूसरों को प्रोत्साहित करने में कुशल रहते हैं। इनका भाग्य उच्च श्रेणी का होने से एक दिन ये अपने श्रम, लगन, स्थिर प्रकृतिवश सर्वोच्चता को प्राप्त करते हैं। सूर्य प्रकाशित ग्रह होने से इनको हमेशा प्रकाश में रहना सुखकर लगता है और ये ऐसे ही कार्यक्षेत्र को पसन्द करते हैं, जिसमें इनको नाम तथा यश दोनों ही मिलें। भाग्यांक 1 के प्रभावित जातकों के लिए भाग्यांक के प्रभाव से भाग्योदय उन्नीस वर्ष की अवस्था से प्रारंभ होकर अट्ठाइसवें वर्ष की अवस्था पर उच्चता मिलती है तथा सैंतीस वर्ष की अवस्था पर पूर्ण भाग्योदय होता है। भाग्यांक के प्रभाव से इनकी आयु के ऐसे वर्ष जिनका योग 1 होता है, वह भी इनके लिए भाग्योदय कारक रहते हैं, जैसे आयु वर्ष 10, 19, 28, 37, 46, 55, 64 और 73 वें वर्ष इनके लिए योगकारी सिद्ध होते हैं। ऐसे ईस्वी सन् जिनका योग 1 आता है वे भी भाग्यांक 1 से प्रभावित व्यक्तियों को अनुकूल जाते हैं। जैसे सन् 2008, 2017, 2026, 2035, 2044, 2053, 2062, 2071, 2080। इन वर्षों में इनके जीवन में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित होती हैं।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

8178677715, 9811598848

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