मुहूर्त से किए काम होते हैं फलदायी

मुहूर्त से किए काम होते हैं फलदायी

किसी भी काम की शुरूआत यदि ज्योतिष और वास्तु के अनुसार हो तो उसके सफल होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। देवर्षि नारद, वशिष्ठ की वास्तु दृष्टि से वैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष और फाल्गुन मास सभी कार्यों के लिए उत्तम माने गए हैं।
व्यक्ति जीवन में यूं तो हर काम अपनी सुविधा के अनुसार संपन्न करता है लेकिन ऋषि-महर्षि, मुनियों और ज्योतिष वास्तु के अनुसार प्रत्येक काम मुहूर्त के अनुसार किया जाए तो उसके सफल होने की संभावना कहीं ज्यादा होती है। विद्वानों के अनुसार जो कार्य नक्षत्र-मुहूर्त देखकर किए जाते हैं, उनमें ईश्वरीय सहमति शामिल होती है। देवर्षि नारद व वशिष्ठ की वास्तु दृष्टि से वैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष और फाल्गुन मास सभी कार्यों के लिए उत्तम माने गए हैं। नारद के अनुसार भवन निर्माण के लिए कार्तिक, माघ, मार्गशीर्ष फाल्गुन व वैसाख मास उत्तम माने गए हैं जिन्हें वशिष्ठ की दृष्टि में पुत्र-पौत्र व धनकारक माना गया है। इन महीनों को वाद-विवाद रहित सर्वसम्मत अर्थकारक पत्नी व पुत्र आदि के लिए भी हितकारी माना गया है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार जल, अग्नि से नष्ट गृह या जीर्ण गृह को नवीन बनाने में श्रावण-कार्तिक व माघ मास को लाभप्रद माना गया है। देवताओं के वास, जल के लिए नलकूप, बोरिंग या पार्क में जल सिंचन के लिए वैशाख, श्रावण मार्गशीर्ष, फाल्गुन, कार्तिक व माघ मासों को भी पुण्यकारी माना गया है। उल्लेखनीय है कि पशुओं का आवास बनाने के लिए ज्येष्ठ मास, धान्य संग्रह, आश्विन, जल धारा व यंत्र निर्माण चैत्र में और भी ज्यादा शुभकारी माने गए हैं। महर्षि वशिष्ठ के मतानुसार गुरू व शुक्र उदय हो तो शुक्ल पक्ष के गृहारंभ में सब प्रकार के सुखों की प्राप्ति तथा कृष्ण पक्ष निर्माण से दिन में गृहारंभ शुभ व रात्रि में निषिद्ध माना गया है।
भवन निर्माण में तिथियां: प्रतिपदा में भवन निर्माण से निर्धनता, चतुर्थी में धन हानि, अष्टमी में अशांति, नवमी में शस्त्राघात, चतुदर्शी में स्त्री हानि व अमावस्या में राजभय माना गया है। लेकिन नक्षत्र व लग्न उत्तम हो तो उक्त तिथियों में निर्माण कार्य संपादित किया जा सकता है। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य विषय यह है कि दिग्द्वार नक्षत्रों में भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।
शुभ नक्षत्र और भवन निर्माण:
महर्षि वशिष्ठ के अनुसार भवन में रवि गृह स्वामी कारक होता है। चंद्रमा पत्नी, गुरू सुख व धन का कारक शुक्र होता है। यदि ये कारक गृह गोचर व जन्म दशा से निर्बल, अस्त, बाल, वृद्ध व नीच राशि के हों तो अपने-अपने कारकों की हानि करते हैं। इसी प्रकार यदि चंद्र-बुध-गुरू-शुक्र नीच राशि या शत्रु राशि या निर्बल निस्तेज हो तो भवन निर्माण करने वाला निर्धन हो जाता है।
भवन निर्माण में अश्विनी, उत्तरा, रेवती, हस्त, चित्र, स्वाती, अनुराधा, पूर्वाषाढ़, धनिष्ठा, पुष्य, मृगशिरा व रोहिणी नक्षत्र शुभ माने गए हैं। इन नक्षत्रों में भवन निर्माण सर्वोत्तम माना गया है। श्रावण मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि, शनि दिन, स्वाती नक्षत्र, शुभ योग व सिंह लग्न के दिन गृहारंम से पुत्र-धन की वृद्धि, वाहन सहित सभी प्रकार के सुख, उपयोगी वस्तु व ऐश्वर्य प्राप्ति होती है। सूर्य के नक्षत्र से 5,7,9,12,19 व 26वें नक्षत्रों में भूमि शयन करती है। अत: भूलकर भी इनमें भवन निर्माण, जल स्रोत आरंभ व यंत्र निर्माण नहीं करना चाहिए।
- नरेन्द्र देवांगन

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