धर्म संस्कृति: तांत्रिक सिद्धियों में काम आने वाली चीजें

धर्म संस्कृति: तांत्रिक सिद्धियों में काम आने वाली चीजें

तांत्रिक क्रियाएं हकीकत हैं या ढकोसला, यह विवादित विषय है लेकिन तांत्रिकों और तंत्र में विश्वास करने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। भूत-प्रेत अर्थात् दुष्टात्माओं को तांत्रिक काबू में करते हैं और ऐसी अदृश्य शक्तियों से मनचाहा काम करवाते हैं। ऐसा बताया जाता है कि तंत्र विद्या में निपुण होने के लिए योग्य तांत्रिक की जरूरत होती है और तंत्र क्रि या में अनेक वस्तुएं जरूरी बताई जाती हैं। उन वस्तुओं का एक परिचय:-

आक पुष्प:- सफेद आक दुर्लभ है। अगर श्वेत आक का फूल तंत्र क्रिया से सिद्ध कर लिया जाए तो फिर यह मनुष्य की लगभग हर भौतिक जरूरत पूरी करता है। कहते हैं कि सिद्ध फूल को झोली में डाल लें और हीरा, सोना या किसी अन्य कीमती चीज की कामना करें तो वह झोली में उपलब्ध हो जाएगी।

रूद्राक्ष:- रूद्राक्ष के फूल मुख्य रूप से नेपाल और दक्षिण एशिया के जंगलों में पाए जाते हैं। इसका फल चने से लेकर बेर के बराबर तक बड़ा होता है। इसमें प्राकृतिक आरपार छेद होता है और खड़ी धाराएं होती हैं। इन धाराओं को मुख कहते हैं। ये मुख एक से लेकर इक्कीस तक पाए गए हैं। अलग-अलग संख्या के रूद्राक्षों का विभिन्न तांत्रिक क्रियाओं में अलग-अलग महत्त्व है। एकमुखी रूद्राक्ष सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है। यह अत्यधिक दुर्लभ है। इसे भगवान शिव का स्वरूप माना गया है।

शतावर:- लगभग 5 फुट ऊंचाई वाला पौधा शतावर हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। तंत्र के अंतर्गत शतावर के पत्ते से 'बलाबल साधना' संपन्न की जाती है। कहते हैं बलाबल सिद्धि प्राप्त होने पर आदमी हनुमान की भांति बलवान और उन्हीं की भांति देह को लघु या विशाल आकार देने में सक्षम हो जाता है।

नारियल:- ऊपर का खोल हटाने पर लगभग प्रत्येक नारियल पर आंखों जैसे दो निशान और बीच में नाक जैसा निशान मिलता है। बहुत कम ऐसा होता है कि किसी नारियल में सिर्फ एक ही गोल निशान मिले। ऐसे एक निशान वाले नारियल को 'एकाक्षी नारियल' कहते हैं। यह जिस घर में सम्मान-आदर के साथ रखा हो, मान्यता है कि उस घर में धन धान्य की कभी कमी नहीं होती और कष्ट दूर रहते हैं।

हल्दी:-मसाले के रूप में हल्दी का इस्तेमाल संपूर्ण भारत में होता है। यह विभिन्न रोगों में औषधि का काम करती है। हल्दी एंटीसेप्टिक का कार्य भी करती है। कहते हैं कि हल्दी को चंदन की भांति पत्थर पर घिसकर माथे पर तिलक लगाकर देवी काली की साधना की जाए तो काली प्रसन्न हो जाती है और फिर ऐसे कृपापात्र भक्त के मनोरथ पूरे करती है।

मीन मोती:- ऐसी मान्यता है कि उकत्था नामक मछली के मस्तिष्क में भी मोती पैदा होता है। सीप के गर्भ में मोती बनता है यह तो सभी जानते हैं कि लेकिन केवल युवावस्था में उकत्था के दिमाग में बना मोती बाजरे के दाने के बराबर का सफेद मोती तांत्रिकों के लिए बड़ा महत्त्वपूर्ण है। वे इसे सिद्ध कर अपनी आंख में फिट कर लेते हैं। बताया जाता है कि इस मोती की बदौलत वे संसार में घटने वाली घटनाओं को देख सकते हैं।

पारा:- पारा (हिंदी में 'पारद' भी कहते हैं) एक तरल पदार्थ है। इसे किसी सामान्य क्रि या से ठोस रूप में नहीं बदला जा सकता। कोई चीज भी इसमें मिलाना संभव नहीं परंतु कहते हैं कि उच्च सिद्धि प्राप्त योगी इसे हाथ में लेकर अपनी प्राण ऊष्मा से गर्म कर ठोस रूप दे देते हैं। ऐसा करके ठोस पारे से वे शिवलिंग बना डालते हैं। कहते हैं पारद शिवलिंग अगर किसी के पास हो तो उसके आर्थिक कष्ट दूर रहते हैं। अकाल मृत्यु भी उसके पास नहीं फटकती।

शंख:- शंख तीन तरह के माने गये हैं, पुरूष, स्त्री एवं नपुंसक। मान्यताओं के अनुसार नरशंख को बजाने पर अच्छी ध्वनि निकलती है। मादा शंख अधिक सुंदर नहीं होता। इसमें से ध्वनि भी नहीं निकलती। इन दोनों में छिद्र होते हैं जबकि नपुंसक शंख में न छिद्र होते हैं, न ध्वनि निकल सकती है। नर शंखों में एक दक्षिणावर्ती शंख दुर्लभ होता है। यह शंख सबसे महत्त्वपूर्ण है। माना जाता है कि शंख लक्ष्मी प्रतिरूप है। तंत्र साधना में भी यह महत्त्वपूर्ण है। यह जिस घर में हो, वहां धन-धान्य की प्रचुरता रहती है।

गीदड़ का सींग:- कहते हैं कि कभी-कभार किसी गीदड़ के सींग उग आता है। यह सींग जिसे मिल जाए, उसे कभी चोट नहीं लगती। तांत्रिक इसे 'सियार सिंगी' कहते हैं और तंत्रशास्त्र में इसका उपयोग करते हैं।

मारन खोपड़ी:- मानव खोपड़ी का ऊपरी कटोरे जैसा भाग 'खप्पर' कहलाता है। अघोरी, तांत्रिक इनमें भोजन करते व पानी पीते हैं तथा जल भरकर अभिमंत्रित करते हैं। तंत्र क्रि या में खोपड़ी जागरण भी होता है। कहते हैं जागृत खोपड़ी से पलों में इच्छित वस्तु प्राप्त की जा सकती है अथवा कोई अन्य कार्य कराया जा सकता है।

काला चावल:- बंगाल के अनेक स्थानों पर चावल के कुछ पौधों पर कुछ चावल लगते हैं। मान्यता है कि यह चावल माथे पर लगाकर देवी काली की तपस्या की जाए तो काली प्रत्यक्ष दर्शन दे भक्त की मुरादें पूरी करती हैं।

- ए.पी. भारती

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