काम के ब‌िना मोक्ष संभव नहीं..

काम के ब‌िना मोक्ष संभव नहीं..

शास्‍त्रों में चार पुरूषार्थ बताए गए हैं ज‌िनमें तीसरा पुरूषार्थ काम है। माना जाता है क‌ि इसके ब‌िना मोक्ष की प्राप्त‌ि संभव नहीं है। जबक‌ि एक तरफ शास्‍त्र कहता है ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है। ऐसे में ब्रह्मचर्य और काम में से क‌िसी चुना जाए ज‌िससे मोक्ष की प्राप्त‌ि संभव हो पाए।

दूसरी ओर शास्‍त्रों में यह भी कहा गया है क‌ि मोक्ष की कामना रखने वाले को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाह‌िए। अगर इस बात को पूरी तरह मान ल‌िया जा तो तीसरे पुरुषार्थ का कोई मतलब नहीं हर जाता क्योंक‌ि ब्रह्मचर्य का पालन करने पर तीसरा पुरुषार्थ छूट जाएगा ऐसे में मोक्ष प्राप्त‌ि का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।इसके बाद गृहस्‍थ आश्रम में आते हैं जहां जीवन का दूसरा उद्देश्य अर्थ प्राप्त‌ि जरूरी हो जाता है ताक‌ि आप अपने जीवन की जरूरतों को पूरा कर सकें और सुखी जीवन का आनंद प्राप्‍त कर सकें। यहां सृष्ट‌ि के व‌िकास के ल‌िए और मोक्ष की प्राप्त‌ि के ल‌िए काम की जरूरत होती है। काम से ही संतान सुख की प्राप्त‌ि होती है।

शास्‍त्रों में कहा गया है क‌ि पृथ्वी का ऋण तभी उतरता है जब आप उसे अगली पीढ़ी देते हैं यानी आपकी संतान होती है। संतान के पालन पोषण करके जब आप उसे संस्कारी बना देते हैं तब वह आपको मोक्ष की ओर ले जाता है। शास्‍त्रों मे बताया गया है क‌ि संतान संस्कारी होकर धर्म पूर्वक श्राद्ध पर्तण करता है तब मोक्ष की प्राप्त‌ि होती है। इस तरह मनुष्य जीवन के चार उद्देश्य एक दूसरे से जुड़े हैं और इनमें से एक भी छूट जाए तो मोक्ष प्राप्त‌ि का मार्ग बाध‌ित हो जाता है।

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