हमीरपुर : गौरीशंकर बाबा मंदिर में छिपा है सैकड़ों साल का इतिहास

हमीरपुर : गौरीशंकर बाबा मंदिर में छिपा है सैकड़ों साल का इतिहास


हमीरपुर। हमीरपुर से यमुना नदी पार 10 किमी दूर बीबीपुर गांव में गौरीशंकर बाबा मंदिर में सैकड़ों सालों का इतिहास छिपा है। मंदिर में शिवलिंग के गर्भ से 30 फीट गहराई में बनी सुरंग आसपास के कई मंदिरों को भी जोड़ती है। मंदिर के गर्भ के अंदर जमीनी खजाना आज भी कहीं छिपा है, जिसकी सुरक्षा काले सर्प करते हैं। इस शिवलिंग में मां पार्वती की आकृति भी बनी है। यह मंदिर दिन-रात भक्तों के लिए खुला रहता है। मंदिर में कभी भी ताला नहीं पड़ा।

यमुना पुल पार बीबीपुर गांव के बाहर करीब 1 हजार साल पुराना ऐसा मंदिर बना है जो गौरीशंकर मंदिर के नाम से विख्यात है। यहां के पं. रमाकांत बाजपेई ने बताया कि रामप्रताप पाण्डेय व भगवान प्रसाद पाण्डेय सगे भाई थे, जिन्होंने 1 हजार साल पूर्व ये मंदिर बनवाया था। मंदिर के लिए वाराणसी से शिवलिंग लाई गई थी। शिवलिंग में मां पार्वती भी विराजमान हैं। बनारस के पुरोहितों ने यहां कई दिनों तक गांव में रहकर विधि-विधान से शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। शिवलिंग की महिमा बड़ी ही निराली है जो दिन में ये कई बार रंग बदलती है। गौर से देखा जाए तो शिलिंग में अपना चेहरा भी साफ दिखता है। गौरीशंकर मंदिर की शिवलिंग के 30 फीट नीचे गहराई में तहखाना है। तहखाने में एक तख्त पड़ा है जिसे देखने का कोई साहस नहीं जुटा पाता है। मंदिर के भीतर 200 फीट गहरायी में सुरंग है। सुरंग से आसपास के कई मंदिर जुड़े हैं। मंदिर के सामने संवत 1844 का कुआं भी बना है जो मंदिर से सुरंग के जरिए जुड़ा है। सावन के आखिरी सोमवार के दिन बीबीपुर और हमीरपुर के अलावा कई गांवों से काफी संख्या में लोग यमुना नदी के जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे।

खजाने के चक्कर में कई बार लोगों ने की थी खुदाई

गौरीशंकर बाबा मंदिर का कई बार जीर्णाेद्धार करानेे वाले पं. रमाकांत बाजपेई ने बताया कि कई साल पहले गांव के ही कुछ लोगों ने खजाने के चक्कर में रात में चोरी-छिपे शिवलिंग के आसपास 15 फीट तक खुदायी करा रहे थे। तभी शिवलिंग के गर्भ के अंदर अलौकिक प्रकाश होने से खुदाई करने वाले कांप उठे थे। यहां मंदिर के तहखाना में बहुत पुराना काला नाग भी 24 घंटे रहता है, जिसे देख खुदाई करने वाले वहां से तुरंत भाग निकले। एक-एक कर चार लोग बीमार भी पड़ गए थे। बाद में शिवलिंग में माथा टेककर जब माफी मांगी तो एक-एक कर सभी लोग ठीक हो गए। इस घटना के बाद फिर किसी ने मंदिर के गर्भगृह की खुदाई करने की हिमाकत नहीं की।

शिवलिंग का अनादर करने पर बंजारा हुआ था पागल

बीबीपुर के दिनेश मिश्रा और शिवाकांत बाजपेई सहित कई लोगों ने बताया कि इस मंदिर की शिवलिंग बहुत ही चमत्कारी है जो भी यहां माथा टेकता है उसके मन की मुराद पूरी हो जाती है। हमीरपुर के ही कई लोगों की मुरादें इसी मंदिर से पूरी हुई हैं। बताते हैं कि करीब 40 साल पहले बाहर से एक बंजारा(नट) गांव में आया था जो खजाने के चक्कर में साधू का वेश धारण कर मंदिर में रहने लगा था। उसने शिवलिंग का सम्मान नहीं किया। शिवलिंग का चमत्कार भी देखिए कि उसे ऐसा दंड मिला कि वह पागल हो गया। उसे परिजनों ने यहां लाकर शिवलिंग के सामने माफी मांगी और पूजा-अर्चना की तो नट ठीक हो गया था।

आधी रात के बाद ही शिव मंदिर में बजते है घुंघरू

इस मंदिर के वैभव को देख हमीरपुर और आसपास के कई इलाकों के लोग सावन में बड़े ही श्रद्धाभाव से पूजा करने जाते हैं। इस मंदिर में कभी ताला नहीं लगाया जाता लेकिन रात में 12 बजे के बाद मंदिर और 100 की परिधि में कोई भी ठहर नहीं सकता। पं.रमाकांत बाजपेई का दावा है कि रात 12 बजे के बाद मंदिर में अचानक उजाला होता है और घुंघरू की आवाजें आती हैं, जो दूर-दूर तक सुनाई देती है। मंदिर के अंदर नृत्य भी होता है। इस मंदिर में पिछले 50 सालों से सावन के सोमवार को कई गांवों से काफी संख्या में श्रद्धालु यमुना नदी के जल से जलाभिषेक करते हैं।


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