ठाकुर जी और उनका दया भरा हाथ

ठाकुर जी और उनका दया भरा हाथ

इस भजन की ये लाइनें कितनी सही हैं कि थोड़ा ध्यान लगा, प्रभु जी दौड़े चले आएंगे। तुझे गले से लगाएंगे, थोड़ा ध्यान लगा। अगर हम अपने इष्ट को मन से ध्याते हैं तो वो हमें कभी बेसहारा नहीं बनाते। साथ-साथ रहकर हर मुश्किल घड़ी से निकाल लेते हैं। बस हमारा ध्यान उनकी ओर संपूर्ण समर्पण सहित होना चाहिए।

एक छोटी सी घटना से यह विश्वास और दृढ़ हो जाता है कि प्रभु कभी भक्तों को भंवर में नहीं छोड़ते। अगर अपने कर्मों के कारण भक्त पर कोई आपत्ति भी आती है तो वो थोड़ी परीक्षा लेकर चली जाती है। एक बार एक छोटे शहर में ठाकुर जी का मंदिर था। मंदिर का परिसर काफी बड़ा था। कुछ कमरे मंदिर के किराये पर उठे हुए थे। पंडित जी का विन्रम निवेदन होता था कि जो भी इन कमरों में रहेगा, उन्हें प्रात: शाम आरती के समय दर्शनों के लिए आना होगा।

तीन भाइयों का संयुक्त परिवार भी वहां रहता था। वो प्रतिदिन प्रात:, शाम परिवार के सभी बड़े से छोटे सदस्य आरती के समय वहां एकत्रित होते थे। आसपास के कई लोग भी आते थे। आरती के बाद हरे राम, हरे कृष्ण का संकीर्तन होता था। सभी मन लगा कर उसमें भाग लेते थे।

एक बार तीनों भाई गांव गये हुए थे। वहां की जमीन मेंं बुवाई करनी थी। उनके तीनों पुत्र और उनका एक मित्र भी साथ था। काम समाप्त होने पर बच्चे सरपंच के टै्रक्टर पर गांव का चक्कर लगाने के लिए बैठ गए। ड्राइवर उन्हें घुमाने थोड़ा आगे तक ले गया। अचानक टै्रक्टर बड़े से पेड़ और दीवार से टकरा कर पूरा उलट गया। बच्चे ड्राइवर सब नीचे और ऊपर टैऊक्टर। अचानक तीनों भाई घूमते हुए वहां से निकले। उन्होंने आवाजें सुनी, कुछ दबी दबी-बचाओ। वे आवाज की ओर मुड़े और देखा कि एक टै्रक्टर उलटा पड़ा है। शायद कुछ लोग उसके नीचे हैं जो बचाओ बचाओ बोल रहे हैं।

तीनों भाइयों ने एक एक कर पांच लोगों को टै्रक्टर के नीचे से निकाला और देखा वो सब उनके परिवार के बच्चे और सरपंच का ड्राइवर था। वे यह देख हैरान रह गये कि किसी को कोई चोट नहीं लगी थी। जब हम तीनों भाइयों ने निकालना शुरू किया था तो हम तीनों ठाकुर जी को याद कर रहे थे। उन्हीं ठाकुर जी की कृपा से सब ठीक ठाक रहा।

बच्चों ने डर के मारे पहले तो कुछ नहीं बोला। बाद में उन्होंने बताया कि जैसे ही हम ट्रैक्टर के नीचे दबे, हमारे कानों में मंदिर की घंटियों के साथ 'हरे राम, हरे कृष्ण का संकीर्तन सुनाई दे रहा था। उन्हीं कृष्ण जी ने हम सब को जीवन दान दिया है, हमें अपने गले से लगाया है। सभी लोग खुशी खुशी अगले दिन घर की ओर गये और मंदिर जाकर उनका धन्यवाद किया। यह सच है कि उनका हाथ हमारे सिर पर हैं तो हम निश्ंचत हैं।

- नीतू गुप्ता

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