जानिए! क्यों किया जाता है कर्पूरगौरं मंत्र का जाप

जानिए! क्यों किया जाता है कर्पूरगौरं मंत्र का जाप

कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जिन्हें हमेशा मृत्यु का भय सताता रहता है, ऐसे व्यक्तियों को एक खास मंत्र का जाप करने से लाभ होता है। लोग इस मंत्र का जाप तो करते हैं लेकिन इसके प्रभाव के बारे में नहीं जानते हैं। इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है और भगवान शिव को ये मंत्र बहुत प्रिय है। अगर व्यक्ति प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करता है तो इससे वह भयमुक्त रहता है। आइए आपको बताते हैं इस मंत्र के बारे में ...........

कर्पूरगौरं मंत्र :-

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।

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मंत्र का अर्थ :-

कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।

करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।

संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।

भुजगेंद्रहारम्- इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।

सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है।

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मंत्र का पूरा अर्थ-

जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है।

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