हमीरपुरः धराशायी होने लगे बारहवीं सदी के मठ-मंदिर

हमीरपुरः धराशायी होने लगे बारहवीं सदी के मठ-मंदिर


-ग्रेनाइट और चूना मिश्रित प्लास्टर से बना था चंदेल मंदिर

-उपेक्षा के कारण मंदिर के कई हिस्से हो गये धराशायी

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बारहवीं सदी में बने चंदेली मठ-मंदिरों के धराशायी होने का सिलसिला अब शुरू हो गया है। हालांकि यहां कई ऐतिहासिक धरोहर पुरातत्व विभाग के मानचित्र पर आ चुकी है। इसके बाद भी धरोहरों को बचाने के लिये त्वरित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

जिला मुख्यालय से पचास किमी दूर सरीला तहसील क्षेत्र में करियारी गांव स्थित है। यह गांव सरीला तहसील से पांच किमी दूर है। गांव के उत्तर-पूर्व दिखा में खेतों के मध्य दो किमी पैदल चलने पर चंदेली मठ नाम से प्रसिद्ध एक मंदिर के दर्शन होंगे। यह मंदिर 12 वीं सदी का बताया जा रहा है। मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट प्रस्तर खण्डों से करीब 3 मीटर ऊंच चबूतरे पर किया गया। चबूतरे का निर्माण बड़े आकार के अनगढ़ पत्थरों से कराया गया है।

पश्चिम दिशा में मंदिर की तल छन्द में वर्गाकार में मुख मण्डप तथा पथ मार्ग बना है। मंदिर के गर्भगृह चारों ओर से स्तम्भों के सहारे छत से आच्छादित है। मंदिर के स्तम्भ भी घट, पल्लव अलंकृत है। मंदिर के पथ पर प्रकाश व्यवस्था एवं हवा के लिये भी इंतजाम है। इस एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिये सरकार ने भी कोई पहल नहीं की। उपेक्षा के कारण ही मंदिर का दक्षिण और पश्चिम हिस्सा धराशायी हो गया है।

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी झांसी डॉ एसके दुबे ने शनिवार को बताया कि यह मंदिर एतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। मंदिर का शुकनास भाग चौत्य गवाक्ष एवं हीरक आकृतियों से सज्जित है। मंदिर की खुरदुरी भित्तियों को चिकना बनाने के लिये चूना मिश्रित प्लास्टर किया गया था, जिसके अवशेष आज भी मंदिर में देखे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह मंदिर शैलीगत आधार पर बारहवीं सदी में निर्मित हुये थे। मंदिर अभी भी सुरक्षित स्थिति में है लेकिन बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस तरह के ज्यादातर मंदिर धराशायी हो चुके हैं। करियारी का यह मंदिर वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है, जिसे संरक्षित किये जाने के लिये सरकार ने मंजूरी भी दे दी है लेकिन अभी इसका नोटिफिकेशन होना बाकी है।

चंदेली मंदिर को चमकाने में खर्च होंगे एक करोड़ रुपये

डॉ एसके दुबे ने बताया कि हमीरपुर जनपद के सरीला क्षेत्र में करियारी गांव का चंदेल मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। इसका निर्माण बारहवीं-तेरहवीं सदी में कराया गया था। पूरा मंदिर ग्रेनाइट पत्थरों से बना है। पत्थरों को चूना मिश्रित प्लास्टर से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक धरोहर को सरकार के फैसले के बाद पुरातत्व विभाग ने अपने आधीन ले लिया है। शासन से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चंदेल मंदिर (मठ) को चमकाने के लिये एक करोड़ की कार्ययोजना तैयारी की जायेगी। इस योजना में मदिर के टूटे पड़े पत्थरों को जोड़कर पुरानी स्थिति में लाया जायेगा। मंदिर का सुन्दरीकरण कराने के साथ ही पहुंच मार्ग और व रास्ते भी बनवाये जायेंगे। मंदिर के चारों और सुरक्षा के लिहाज से बाउन्ड्रीवॉल भी बनवाई जाएगी।

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