गणेश चतुर्थी पर इस विधि से करें भगवान गणेश का पूजन

गणेश चतुर्थी पर इस विधि से करें भगवान गणेश का पूजन

भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए गणेश दमनक चतुर्थी व्रत किया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। गणेश चतुर्थी के दिन अगर पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की जाए तो जीवन की सभी मुश्किलें आसान हो जाती हैं। यह तिथि भगवान गणेश की सबसे प्रिय तिथि है। इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें पूजा....


सबसे पहले मिट्टी या बालू से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं, अगर आप चाहें तो सोने-चांदी से बने गणपति के सिक्के भी खरीद सकते हैं ।

गणपति को घर लाकर आसन पर विराजित करें।

अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद ओम 'गं गणपतये नमः' मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें।

भगवान गणेश के मस्तक पर सिंदूर अर्पण करें।

इक्कीस दूर्वा लेकर गणेश जी को गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य चढ़ाएं।

भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाएं और उन्हें 21 दूर्वा दल समर्पित करें।

पूजा के बाद भोग लगे मोदकों को सभी को प्रसाद के रूप में बांट दें।

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए करें इस मंत्र का जाप :-

ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।

संकटनाशक गणेश स्तोत्र :-

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्र विनायकम् ।

भक्तावासं स्मरेन्नित्यायुष्कामार्थसिद्धये ॥1॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।

तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥2॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।

सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥ 3 ॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥4॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।

न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिश्च जायते ॥5॥


विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।

पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥

जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।

संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥7॥

अष्टाभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।

तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥

इस मंत्र का जाप :-

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

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