भगवान शिव के भी परमप्रिय सेवक हैं धन के देवता कुबेर, प्रसन्न करने के लिए करें इस मंत्र का जाप

भगवान शिव के भी परमप्रिय सेवक हैं धन के देवता कुबेर, प्रसन्न करने के लिए करें इस मंत्र का जाप

धन के देवता कुबेर भगवान शिव के परमप्रिय सेवक हैं। सावन के महीने में अगर भगवान शिव की पूजा के साथ - साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाए तो इससे धन वृद्धि होती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार कुबेर देवता धन के देवता हैं अगर ये किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसे कभी भी धन की कमी नहीं होती है वहीं अगर ये किसी से रुष्ट हो जाएं तो उसे धन संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है ।

कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष भी हैं अर्थात देवताओं को भी कुबेर ही धन प्रदान करते हैं। इनकी कृपा से किसी को भी धन प्राप्ति के योग बन जाते हैं। धन के अधिपति होने के कारण इन्हें मंत्र साधना द्वारा प्रसन्न करके आप भी अपार धन सम्पदा के मालिक बन सकते हैं।

कुबेर को प्रसन्न करने का मंत्र इस प्रकार है-

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

कुबेर मंत्र को दक्षिण की ओर मुख करके ही सिद्ध किया जाता है। यह देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का अमोघ मंत्र है। इस मंत्र का तीन माह तक रोज 108 बार जप करें।

मंत्र का जप करते समय अपने सामने धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। तीन माह के बाद प्रयोग पूरा होने पर इस कौड़ी को अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें। ऐसा करने पर कुबेर देव की कृपा से आपका लॉकर कभी खाली नहीं होगा। हमेशा उसमें धन भरा रहेगा।

कुबेर देव का अति दर्लभ मंत्र इस प्रकार है-

मंत्र- ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वरायरू नमः।

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