संतान गोद लेने / गोद लिया जाना - ज्योतिषीय विश्लेषण

संतान गोद लेने / गोद लिया जाना - ज्योतिषीय विश्लेषण


यह सर्वविदित है कि स्त्री और पुरुष संतान प्राप्ति की कामना के लिए विवाह करते हैं। वंश परंपरा की वृद्धि के लिए एवं परमात्मा की रचना में सहयोग देने के लिए यह आवश्यक भी है। पुरुष पिता बन कर तथा स्त्री माता बन कर ही पूर्णता का अनुभव करती है। धर्म शास्त्र भी यही कहते हैं कि संतानहीन व्यक्ति के यज्ञ, दान, तप व अन्य सभी पुण्यकर्म निष्फल हो जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार संतान न केवल इस लोक में सुख देती हैं, वहीं परलोक की सुख-शांति में सुख की प्राप्ति के लिए भी संतान को आवश्यक बताया गया है। जिन दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति प्राकृतिक रुप से नहीं हो पाती हैं, वे सभी संतान सुख प्राप्ति के लिए संतान गोद लेते हैं। निसंतान दंपत्ति अक्सर इस उहापोह की स्थिति का सामना करते हैं कि क्या उन्हें अपनी संतान की प्रतिक्षा करनी चाहिए या उन्हें संतान गोद ले लेनी चाहिए। इस विषय परिस्थिति से बाहर लाने में पति-पत्नी दोनों की जन्मकुंडलियों का सूक्ष्म अध्ययन किसी योग्य ज्योतिषी से कराना उपयोगी साबित होता है।

आईये जाने कि निसंतान दंपत्तियों के लिए ज्योतिष विद्या किस प्रकार उपयोगी साबित हो सकती है।-

पति व पत्नी की कुंडली में निम्न ज्योतिषीय योग होने पर दंपत्ति को प्राकृतिक रुप से संतान सुख प्राप्त नहीं हो पाता हैं-

• केतु-बृहस्पति के साथ परिवार भाव (द्वितीय) में स्थित हो और बृहस्पति कम अंश के हो।

• पंचमेश पंचम में षष्ठेश, अष्टमेश और द्वादशेश के साथ हो और पापकर्तरी योग में हो।

• पंचम भाव में मंगल की राशि में शनि और राहु स्थित हो।

• पंचमेश बुध की राशि में पाप स्थान में स्थित हो और गुरु भी बुध की राशि में स्थित हो।

• शनि पंचम भाव में लग्नेश या पंचमेश के राशिपरिवर्तन में हो और गुरु कमजोर हो।

• पंचमेश और बुध 6, 8 और 12वें भाव में प्राकृतिक शुभ ग्रहों से दृष्ट हो।

• पंचमेश मंगल के साथ हो और शनि से दृष्ट हो।

• ८वें भाव का स्वामी पंचम में और पंचमेश द्वादश में हो और बृहस्पति केंद्र में हो।

• शनि पंचम भाव, राहु चतुर्थ या द्वादश में हो पाप ग्रहों से पीड़ित हो।

• लग्न भाव में सम राशि उदित हो, पंचमेश चतुर्थ भाव में शनि से पीड़ित हो।

• सप्तमेश पंचम में हो पाप प्रभाव में हो और त्रिक भावों में गुरु उच्चस्थ हो।

• पंचम भाव में बुध या शनि की राशि हो, और शनि की दृष्टि चतुर्थ पर हो।

• चतुर्थ एवं दशम भाव में पाप ग्रहों की उपस्थिति हो।

• यदि जन्मपत्री में कर्क या सिंह राशि में पीडित होने पर।

• चंद्रमा अथवा सूर्य पाप ग्रहों के साथ हों या उनसे दृष्ट हों।

• सूर्य या चंद्रमा शत्रु क्षेत्री ग्रहों से युत हो।

• अष्टमेश पाप ग्रह से युत होकर दशम भाव में गया हो।

• नवम भाव या नवमेश चर या द्विस्वभाव राशिगत बलवान होने तथा शनि से युत अथवा दृष्ट होने पर।

उपरोक्त योगों में से यदि कुंडली में कोई एक योग निर्मित हो रहा हो तो आवश्यक नहीं है की दंपत्ति निसंतान हो, अपितु दत्तक संतान प्राप्त करने के लिए आवश्यक है की दो या दो से अधिक योग बन रहे हो।

गोद लिए जाने वाले जातकों की कुंडली का अध्ययन -

कुंडली 1-

21-09-1947, 10-30, जोधपुर

प्रस्तुत कुंडली तुला लग्न और वृश्चिक राशि की है। पंचमेश दशम भाव में, सप्तमेश मंगल के साथ, कर्क राशि पीड़ित है। चन्द्रमा स्वयं पाप ग्रहों के साथ परिवार भाव में है, यहाँ परिवार भाव भी पीड़ित है। सूर्य भी पाप ग्रहों की युति में है। पंचम भाव पर मंगल की दृष्ट है।

उपरोक्त कुंडली में संतान गोद लेने का प्रथम नियम लागू होता है। यहां केतु-बृहस्पति के साथ परिवार भाव (द्वितीय) में स्थित हैं और बृहस्पति कम अंश के भी है।

इस जातक को इसके पिता के बड़े भाई ने गोद लिया और आज यह बहुत बड़ी धन सम्पति का स्वामी है।

कुंडली 2 -

12-06-1896, 09-00, लखनऊ

यह कुंडली कर्क लग्न और मिथुन राशि की है। कुंडली में सिंह राशि पाप ग्रहों के अक्ष में है। केतु ग्रह द्वारा अधिग्रहित है। कर्क राशि पर भी सप्तमेश और अष्टमेश शनि की दशम दृष्टि है। चतुर्थ स्थान में पाप ग्रह शनि की स्थिति है। नवमेश गुरु लग्न भाव में चर राशि में और अष्टमेश दृष्ट है। यह जातक रिश्तेदारों के द्वारा युवावस्था में गोद लिया गया।

इस कुंडली में नवम भाव या नवमेश चर या द्विस्वभाव राशिगत बलवान हैं तथा शनि से दृष्ट हैं अत: इस यहां यह ज्योतिषीय नियम पूर्णत: लागू हो रहा है। जिसके फलस्वरुप इन्हें संतान गोद लेने की स्थिति का सामना करना पड़ा।

कुंडली 3

11-12-1879, 2-13, अकोला

कन्या लग्न और तुला राशि की कुंडली में चंद्र द्वितीयेश शुक्र के साथ परिवार भाव में है। अष्टमेश मंगल से दृष्ट है। चतुर्थ भाव पर राहु-केतु प्रभाव है। नवमेश शुक्र पर वक्री और अष्टमेश मंगल का पाप प्रभाव है। सूर्य वैसे तो पाप ग्रहों के साथ नहीं है परन्तु सूर्य पर भी अष्ठमेश की अष्टम दृष्टि है। नवम भाव पर शनि की तीसरी दृष्टि पिता सुख में कमी और चतुर्थ भाव पर राहु केतु प्रभाव ने मातृ सुख की कमी की। जातक का जन्म साधारण परिवार में हुआ। इस जातक को गोद लिया गया और इससे इनके जीवन में अचानक परिवर्तन हुआ। इसके फलस्वरूप इन्हें अकूत धन संपत्ति की प्राप्ति हुई। सामजिक कार्य करने के अवसर प्राप्त हुए।

इस कुंडली में पंचमेश सप्तम में हैं, पाप कर्तरी में है और त्रिक भावों में गुरु पीडित है। पंचम भाव में बुध या शनि की राशि हैं और शनि की दृष्टि चतुर्थ पर हैं एवं चतुर्थ एवं दशम भाव में पाप ग्रहों की उपस्थिति हैं। इस कुंडली पर उपरोक्त में से तीन योग लग रहे हैं।

संतान गोद लेने वाले दम्पतियों या अभिभावकों की कुंडलियों का अध्ययन –

सुष्मिता सेन

सुष्मिता सेन की कुंडली तुला लग्न और वृषभ राशि की है। इनकी कुंडली में लग्न सप्तम में राहु केतु स्थित है। चतुर्थ भाव पर शनि की सप्तम दृष्टि और सप्तमेश मंगल की अष्टम दृष्टि है। विवाह भाव और संतान भाव दोनों पाप ग्रहों से पीड़ित है। दोनों भावों पर राहु की दृष्टि है। सप्तम, सप्तमेश पर राहु की अशुभता, विवाह और संतान कारक गुरु रोग भावस्थ है। विवाह में विलम्ब के ज्योतिषीय योगों के कारण इनका अभी तक विवाह नहीं हुआ है। परन्तु ज्योतिषीय योग, दशा और गोचर यह कहती है की साल २०१९ में विवाह सूत्र में बंध सकती है। सुष्मिता की कुंडली में पंचमेश शनि वक्री है। संतान कारक गुरु भी वक्री है और सभी पीड़ित भी है। सुष्मिता सेन ने दो बेटियां गोद लिए हुई है। जिनका पालन-पोषण सुष्मिता कुशलता से कर रही है-

रवीना टंडन

रवीना टंडन की कुंडली धनु लग्न और कुम्भ राशि की है। कुंडली में पंचमेश मंगल एकादश भाव में बुध, सूर्य और शुक्र के साथ है। पंचमेश मंगल अस्त है। संतान कारक गुरु वक्री अवस्था में पराक्रम भाव में अष्टमेश चंद्र के साथ है। पंचमेश की दूसरी सारी राशि है, जिस पर राहु स्थित है। रवीना टंडन ने एक से अधिक संतान गोद ली हुई है।

मिथुन चक्रवर्ती

मिथुन चक्रवर्ती की वैसे तो बच्चे हैं लेकिन फिर भी इन्होंने एक बेटी को गोद लिया हुआ है। मिथुन लग्न और मिथुन राशि में मिथुन चक्रवर्ती का जन्म हुआ। पंचम भाव में तुला राशि हैं। जिस पर शुक्र, शनि और गुरु की दृष्टि आ रही है। इस प्रकार इनके तीन बच्चे है। चौथी बेटी इन्होंने गोद ली है। संतान सुख के स्वामी शुक्र हैं जिन पर आयेश मंगल की आठवीं दृष्टि है। संतान कारक गुरु नवमेश शनि के दृष्टि प्रभाव में है। कारक और भावेश का पंचम भाव से प्रत्यक्ष संबंध बनने के फलस्वरुप संतान की प्राप्ति हुई।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

8178677715, 9811598848

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