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  • अनमोल वचन

    व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आंकलन उसके जीवन मूल्यों से किया जाता है। सफलता के लिये जीवन मूल्यों को अपनाना नितांत आवश्यक है। वैदिक काल से होते हुए गौतम बुद्ध, स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द तक अनेक महापुरूष जीवन मूल्यों के कारण अमर हो गये, जीवन मूल्य व्यक्ति को सकारात्मक बनाते हैं। याद रखें जो...

  • अनमोल वचन

    श्रेष्ठ तथा सफल व्यक्ति वही है, जो अपनी असफलता के लिये दूसरों को दोषी नहीं ठहराता, न ही किसी असफल व्यक्ति का उपहास करता है। अपने अनुभवों के आधार पर ही सत्य-असत्य की परख करता है, जो पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होकर व्यवहार नहीं करता, प्रत्येक व्यक्ति का मूल्यांकन उसके गुणों के आधार पर ही करता है, वह...

  • अनमोल वचन

    हम सभी भारत मां की सन्तान हैं, जिसकी मिट्टी से हमारे शरीर की रचना हुई, जिसके अन्न, जल से हमारा पोषण होता है और इसी भारत मां की गोदी में समा जाना है। हम सब इसी मां भारती के त्रणी हैं। कोई ऐसा कार्य नहीं करना है, जो इससे द्रोह की संज्ञा में आये। इस माटी का कर्ज उतारने के लिये, इसकी उन्नति के लिये,...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य योनि के कर्म सिद्धांत अति सूक्ष्म, गहन एवं जटिल हैं। यहां प्रारब्ध भोग भी पूरे होते हैं और नये कर्म भी बनते हैं। जैसे किसी का प्रारब्ध भोग उसके विवाह के रूप में आता है, तो उसका विवाह तो होगा। प्रारब्ध के अनुसार विवाह की दिशा, दशा तय होती है, सुखद या दुखद, इसी पर निर्भर होता है। विवाह से भोग...

  • अनमोल वचन

    जिन अवस्थाओं में, जिन योनियों में केवल क्रियाएं होती हैं, कर्म नहीं बनते, उन्हें भोग योनियां कहा जाता है। इन योनियों में भ्रमण कर जीव अपने प्रारब्ध भोग पूरे करता है। वहां उससे नये कर्म नहीं बन पडते, केवल पूर्व जन्मों का भोग होता है। शेर की योनि में शेर अपने नियत प्रारब्ध को भोगने आता है, वह...

  • अनमोल वचन

    क्रिया और कर्म दोनों का आपस में सम्बन्ध होते हुए भी दोनों भिन्न-भिन्न हैं। क्रिया भावना शून्य होती है, जबकि क्रिया के विपरीत कर्म में इच्छा, भावना, संस्कारों की प्रेरणा के साथ गहरे संकल्प की प्रधानता रहती है। क्रिया में जब इच्छा और भावना जुड जाती हैं तो वह क्रिया कर्म बन जाती है। इच्छा और भावना के...

  • अनमोल वचन

    कर्म की गति अति गहन हैँ इसकी गहनता को समझना दुष्कर एवं कठिन कार्य है। कर्म धारा में चलकर इंसान कब पशुता के गहरे कीचड में गिर जाये और कब देवत्व की ओर अग्रसर हो जाये पता नहीं चलता। पता तब चलता है, जब कर्म का परिणाम सामने आने लगता है। उस समय उसे भोगने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प शेष नहीं रहता। कर्म...

  • अनमोल वचन

    अपवाद हर क्षेत्र और हर परिस्थिति में पाये जाते हैं। सन्तान के विषय में भी अपवाद स्वरूप कई इष्टान्त ऐतिहासिक रूप से विद्यमान हैं। पुलस्त्य ऋषि के घर रावण, उग्रसैन के घर कंस और हिरण्यकश्यप के घर प्रह्लाद ने जन्म लिया, परन्तु सामान्यतया ऐसा नहीं होता, अपवाद तो अपवाद ही होते हैं, फिर भी यह बात सत्य है...

  • अनमोल वचन

    इस संसार में विषम परिस्थितियों का आना असम्भाव्य नहीं। अमीर-गरीब, सबल-निर्बल सभी पर आपत्ति आ सकती है। कभी-कभी ये आपत्तियां इतनी आकस्मिक और जटिल होती हैं कि सहसा उनका सम्भल पाना असम्भव हो जाता है। ऐसे समय में उनमें हाथ बंटाने के लिये सहृदय तथा सच्चे मित्रों की बडी आवश्यकता होती है, किन्तु जिनके पास...

  • अनमोल वचन

    हम अच्छी नौकरी पाने अथवा पसंदीदा रिश्तों को जोडने के लिये एक न एक बार झूठ तो बोलते ही हैं और उस झूठ को छुपाने के लिये एक और झूठ बोलते हैं और ऐसे झूठ की एक-एक ईंट रखते हुए हम झूठ की एक पूरी दीवार खडी करके उसे और मजबूत बना देते हैं। हमें अपने आसपास ऐसे कम लोग दिखाई देते हैं, जो अपनी वास्तविक स्थिति...

  • अनमोल वचन

    कई बार हम स्वयं को दूसरों से बेहतर दिखाने के लिये झूठ का नकाब ओढ लेते हैं, ताकि हम वास्तविकता को छुपाकर एक नया और दूसरों को अच्छा दिखने वाला चेहरा दिखा सकें। यह मनुष्य का स्वाभाव है कि वह खुद को दूसरों से बेहतर दिखाने के लिये अपने बदसूरत झूठ पर खूबसूरती से झूठ की परत चढा देते हैं, परन्तु झूठ ज्यादा...

  • अनमोल वचन

    साच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हृदय साच है, ताके हृदय आप।। कवि कहता है कि सत्य के समान तपस्या नहीं और झूठ के बराबर कोई पाप नहीं, जिसके हृदय में सत्य विराजमान है, उसके हृदय में परमात्मा प्रतिष्ठित रहते हैं। हमें बचपन से माता-पिता तथा हमारे आचार्यों द्वारा यह शिक्षा दी जाती है कि 'झूठ बोलना...

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