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  • अनमोल वचन

    आदमी यदि इस सच्चाई को जान ले कि वह काल के बन्धन में है और परमात्मा की व्यवस्था में परिवर्तन उसकी सीमाओं से परे है, तो उसका भय समाप्त हो सकता है और स्वयं को परमात्मा से जोड सकता है। मनुष्य का जीवन दो पहियों पर चल रहा है। एक पहिया स्वार्थों को साथ लेकर चल रहा है, दूसरा परहित अर्थात परिवार और समाज के...

  • अनमोल वचन

    सारी सृष्टि कुछ नियमों से संचालित हो रही है। मनुष्य भी इसका अपवाद नहीं है। वह कितना भी शक्तिशाली और सामथ्र्यवान क्यों न हो जाये स्वछन्द नहीं हो सकता। इस पर सबसे बडा बंधन काल का है। जो संसार में आया है उसे अपने निश्चित समय पर जाना ही है। आज तक कोई भी मृत्यु को जीतकर अमर नहीं हो पाया। हमारे अवतार भी...

  • अनमोल वचन

    दूसरों का शोषण कर वैभव बढाना उस मृग तृष्णा की तरह है, जो देखने में सच मालूम पडते हुए भी मिथ्या होती है। भलाई और बुराई का ऐसा वर्गीकरण नहीं हो सकता, जो अपने लिये एक प्रकार और दूसरों के लिये दूसरे प्रकार का परिणाम दे। आग औरों के लिये गरम और आप के लिये ठंडी सिद्ध हो, ऐसा होना असम्भव है। दूसरों के लिये...

  • अनमोल वचन

    व्यक्ति का व्यक्तित्व सामान्यतया उतना ही दिख पडता है, जितना कि खाने कमाने के काम आता है। यह उसका बहुत छोटा सा अंश है। इसकी क्षमता इतनी ही है कि उससे जीवन यात्रा की गाडी घिसटती चले। गेहूं की भांति उगने और कटने में ही जीवन समाप्त हो जाता है। जिस तिस प्रकार से जीवन गुजार लेना मानव जीवन का लक्ष्य नहीं...

  • अनमोल वचन

    प्रतिभावान व्यक्ति वह है, जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिये अपनी उपयोगिता सिद्ध करता है। साथ ही अपनी उपयोगिता में निरन्तर वृद्धि भी करता है। जो महान है, वह छिपा रहता है, उसे प्रयत्नपूर्वक ढूंढना पडता है। धातु की खदानें ढंूढनी पडती हैं, फिर उपलब्ध पदार्थ का शोधन करना पडता है, तब उपयोगी वस्तु हाथ...

  • अनमोल वचन

    सामान्यतया हम लोगों की पहचान उनकी वेशभूषा, पहनावे के ढंग आदि से करते हैं। विशेष पहनावे वाले व्यक्ति को विशिष्ट मानते हैं और सामान्य ढंग से पहनावे वाले व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति समझते हैं, परन्तु विशेष व्यक्ति वे होते हैं, जो पहनावे को महत्व न देकर कार्य को महत्व देते हैं। उनके सामने उनका कार्य...

  • अनमोल वचन

    शिवरात्रि पर्व भगवान शिव को स्मरण करने का, उनके गुणों को धारण करने की प्रेरणा देता है। उनके अलंकारों में मस्तक पर सुशोभित चन्द्रमा से यही प्रेरणा मिलती है कि हम उनके समान सभी को सुख-शांति और शीतलता प्रदान करें। जटा में समाई गंगा जिस प्रकार बिना भेदभाव के अपना जल स्नेह भाव से सबको प्रदान करती है,...

  • अनमोल वचन

    हममें एक बडी दुर्बलता यह होती है कि जो हमें नहीं मिला, उसके लिये अपने भाग्य को कोसते हैं, परमात्मा को उलाहना देते हैं, किन्तु जो प्राप्त है, उसका शुक्रिया अदा नहीं करते। हम नाशुके (कृत्घन) हो गये हैं। जो परमात्मा की कृपा से हमें मिला है, उसी में सन्तोष करना सीखें। सन्तोष का यह मतलब नहीं कि हम आगे...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य अनेक वस्तुओं की कामना करता है। अपने से बडे और सुखी सम्पन्न स्थिति के लोगों को देखकर यह इच्छा उत्पन्न होती है कि हमारे पास भी इतना ही वैभव और ऐश्वर्य हो। इस प्रकार की तृष्णा ही असन्तोष का कारण बनती है। हमें चाहिए कि अपने से नीचे की स्थिति वााले गरीबों और दुखी लोगों से अपनी तुलना करते हुए...

  • अनमोल वचन

    वाणी का प्रभाव बहुत गहरा होता है। वह अपना दूसरे पर बहुत गहरा प्रभाव छोडता है। वाणी का तीखापन चुभता है। इसकी कठोरता दूसरों पर प्रहार करती है, परन्तु इसकी मधुरता तथा कोमलता औषधि का काम करती है, जो मन में लगे घावों पर मरहम का कार्य करती है। वाणी के माध्यम से व्यक्ति अपनी अभिव्यक्ति दे सकता है। वाणी की...

  • अनमोल वचन

    जिस प्रकार से विभिन्न जीव-जन्तु अपने स्वाभाव और स्वरों को नहीं बदल सकते, उसी प्रकार मनुष्य भी अपनी वाणी और स्वाभाव को नहीं बदल पाते, जबकि मनुष्य का जीवन जीव-जन्तुओं के जीवन से बहुत अलग और उच्च स्तर का होता है, उसमें सोचने-समझने और विचारने की शक्ति है। इसीलिये जीवन में यदि कोई सीख मिलती है, प्रेरणा...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य का व्यक्तित्व तथा प्रभाव झलकता है उसकी वाणी से। जिस प्रकार से संगीत के वाद्य यंत्र की पहचान उसके स्वर से होती है, उसी प्रकार व्यक्ति की पहचान उसकी वाणी से होती है। बोलने का अन्दाज वाणी में झलकता है। भाव सुनने वाले अन्य व्यक्तियों पर अपना प्रभाव डालता है। वाणी की इसी विशेष अभिव्यक्ति के कारण...

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