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  • अनमोल वचन

    समाज में अकेले रहने वाले व्यक्ति को बहुधा यथोचित सम्मान नहीं दिया जाता, किन्तु सच्चाई यह है कि व्यक्ति के अन्दर नवीन विचार तथा आविष्कार की अवधारणा अकेलेपन में ही उत्पन्न होती है। यही कारण है कि बहुधा वैज्ञानिक, लेखक, बुत्रिजीवी एकान्त में अपने कार्य और लेखन करना पसंद करते हैं। अकेला व्यक्ति निर्बल...

  • अनमोल वचन

    अकेले व्यक्ति को कमजोर समझा जाता है, जबकि वास्तविक जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है, जो अकेला चलने में विश्वास रखता है। अकेले चलने का साहस वें व्यक्ति करते हैं, जो जोखिम और मुसीबतों का सामना करने से नहीं घबराते। अधिकांश लोग बने बनाये रास्तों पर भीड के साथ चलना पसंद करते हैं। यही कारण है कि वें लोग...

  • अनमोल वचन

    अमीर और सम्पन्न घरों के बच्चों और निम्न मध्यम वर्ग और गरीब परिवार के बच्चों में यह अन्तर पाया जाता है कि अमीर और सम्पन्न परिवार के बच्चे लापरवाह होते हैं, अपनी पढाई में भी और घर के कार्यों में हाथ बंटाने में भी, जबकि निर्धन और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों में देखने में आता है कि बच्चा अपनी पढाई में...

  • अनमोल वचन

    किसी व्यक्ति की प्रगति में दूसरे लोग तो कम बाधक होते हैं, अपनी प्रगति में व्यक्ति स्वयं बाधक होता है। बाधक कारणों में सबसे बडा बाधक उसका आलस्य होता है, जिसके चलते असफल होने पर लोग अपने ही भाग्य को कोसते हैं। इससे निराशा और कुंठा का जन्म होता है। यदि कोई आलसी स्वाभाव का व्यक्ति किसी काम में हाथ डाला...

  • अनमोल वचन

    सेवा का उद्देश्य पाना नहीं, बल्कि प्राणपण से अपने ईष्टतम, अपने आराध्य, अभीष्ट को समर्पित करना है। इसका पारितोषिक भौतिक नहीं, अनुभूतिपरक होता है। सेवा शाश्वत आनन्द प्रदान करने वाली अनमोल और कभी न समाप्त होने वाली आन्तरिक खुशी प्रदान करती है। सेवा से हृदय सर्वथा प्रफुल्लित और आनन्दित रहता है। दूसरे...

  • अनमोल वचन

    व्यक्ति तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो किसी काम के बारे में सुनते ही कह देते हैं कि यह काम मुझसे होगा ही नहीं। दूसरे वे जो करना तो चाहते हैं, उसे शुरू भी करते हैं, परन्तु किसी कठिनाई के आते ही उसे छोडकर पीछे लड्डौट जाते हैं, नहीं सोचते कि अंजाम क्या होगा। तीसरे वे जो काम शुरू करने से पहले दस...

  • अनमोल वचन

    व्यक्ति तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो किसी काम के बारे में सुनते ही कह देते हैं कि यह काम मुझसे होगा ही नहीं। दूसरे वे जो करना तो चाहते हैं, उसे शुरू भी करते हैं, परन्तु किसी कठिनाई के आते ही उसे छोडकर पीछे लौट जाते हैं, नहीं सोचते कि अंजाम क्या होगा। तीसरे वे जो काम शुरू करने से पहले दस बार...

  • अनमोल वचन

    परमात्मा को असीम तथा अनन्त के बारे में उपनिषदों में बहुत कुछ विरोधाभाषी प्रतीत होने लगता है, परन्तु ऐसा है नहीं। इनमें से एक बात है कि अंश हमेशा पूर्ण के बराबर होता है, क्योंकि अनन्त को बांटा नहीं जा सकता। ठीक वैसे ही जैसे कि आकाश का विभाजन सम्भव नहीं। कहने वाले भले ही कहे मेरे घर के ऊपर का आकाश...

  • अनमोल वचन

    मन तो बस दर्पण है। यदि वह स्वच्छ है, शुद्ध है तो असीम (परमेश्वर) प्रतिबिंबित हो सकता है। हां यह प्रतिबिम्ब असीम न होगा पर झलक अवश्य होगी उसकी परन्तु वही झलक बाद में द्वार बन जाती है। प्रतिबिम्ब पीछे छूट जाता है और अनन्त में प्रवेश मिल जाता है। बाहरी तौर पर यह बात अटपटी लग सकती है। भला कैसे इतने...

  • अनमोल वचन

    धन संचय की प्रवृत्ति मनुष्य में सदा से रही है। संत लोग इसे आदमी की दुर्बलता या अविश्वासी प्रवृत्ति भी कहते हैं, क्योंकि संचय करने के पीछे एक प्रकार का अविश्वास ही होता है कि क्या भरोसा कि कल परमात्मा देगा कि नहीं देगा। इसलिए कल के लिए आज ही बचाकर रख लें। वास्तव में संचय का अर्थ अपनी आवश्यकताओं से...

  • अनमोल वचन

    विश्वास मन को स्थिर और दृढ करने और रखने की श्रेष्ठ विधि है। विश्वास के विपरीत जितने भी तत्व हैं वे सभी मन को अस्थिर और कमजोर करते हैं। संशय, संदेह, भय, भ्रम मन में जितने बढेंगे, मन उतना ही चंचल और दुर्बल होगा। विश्वास का केन्द्र जैसा है मन की स्थिरता और दृढता भी वैसी ही होगी। विश्वास यदि सामान्य जन...

  • अनमोल वचन

    दान से बडा न तो कोई पुण्य है, न ही कोई धर्म। किसी भी प्रकार का दान यदि निष्काम भाव से किया जाता है तो उसका श्रेष्ठफल प्राप्त होता है। दान इस भाव से करें कि भगवान प्रसन्न हों और उनकी प्रसन्नता के लिये ही दान कर रहा हूं। महत्वपूर्ण यह भी है कि जब कभी दान करें तो मत बताएं कि कितना दान किया, बांयें हाथ...

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