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  • अनमोल वचन

    कोई व्यक्ति कितने भी परिश्रम और लगन से अपने लक्ष्यों की पूर्ति में निरन्तरता बनाये रखे, फिर भी परिस्थितिवश कभी-कभी ऐसा भी होता है कि उसे सफलता न मिल पाये, तो इसे आप अपने पूर्वकृत कर्मों का फल मानकर तत्कालिक संतोष कर सकते हैं, किन्तु अपने प्रयासों में ढील किंचित न आने दें। आज जो कर लेंगे, वही तो कल...

  • अनमोल वचन

    कुछ व्यक्ति स्वाभाव से ईष्र्यालु प्रवृत्ति के होते हैं। दूसरों का कुछ भी अच्छा देखकर वे कुढते रहते हैं। अपने पडौसी, निकट के पारिवारिक सम्बन्धी को साधन सम्पन्न देखकर ईर्ष्या से जलते रहते हैं। सोचते है कि यह व्यक्ति कितना भाग्यशाली है, भगवान ने उसे गाडी दी, रहने को शानदार कोठी दी, नौकर...

  • अनमोल वचन

    अपने सुख-दुख, उन्नति-अवनति, कल्याण-अकल्याण और स्वर्ग-नरक का कारण मनुष्य स्वयं है, फिर दुख या आपत्ति के समय भाग्य के नाम पर संतोष कर लेना और भावी सुधार के प्रति अकर्मण्य बन जाना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति आने पर हमें यह अनुभव कर लेना चाहिए कि अवश्य ही कोई न कोई भूल हुई है, उस पर पश्चाताप कैसे किया...

  • अनमोल वचन

    हमें अपने देश भारत से प्यार करना चाहिए, जैसे हम अपने परिवार से करते हैं। यदि हम वास्तव में मनुष्य हैं तो किसी परिजन को कुछ कष्ट हो जाये तो हम व्याकुल हो जाते हैं, किन्तु क्या वास्तव में हम अपने देश को भी उसी प्रकार प्यार करते हैं? नहीं न? हम देश के कानून का सम्मान नहीं करते, वरन उसकी अवहेलना करना...

  • अनमोल वचन

    आदमी जब किसी कार्य में असफल हो जाता है, काम बिगड जाता है तो भाग्य का रोना रोता है, परन्तु सच्चाई यह है कि हम अपने कार्य के प्रति इतने निष्ठावान नहीं रहे, सचेत नहीं रहे। इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि हमें अपने पूर्व कर्मों के कारण भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पडता है। प्रकृति के विधान के...

  • अनमोल वचन

    हम शांति पाठ करते हैं, जिसमें पदार्थों, औषधियों, सभी दिशाओं, पृथ्वी, अन्तरिक्ष आदि समेत पूरे विश्व में शांति की कामना करते हैं, क्योंकि शांति अनमोल है, बहुमूल्य हीरा है। जो व्यक्ति बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर घूमकर अपना समय नष्ट करते हैं, उन्हें इस अनमोल हीरे की कभी प्राप्ति नहीं होती। यदि शान्ति...

  • अनमोल वचन

    आदमी को अपने प्रारब्ध, अपनी शक्ति, क्षमता और परिश्रम के कारण जो मिल जाता है, उसको बहुधा अपर्याप्त मानता है। थोडा और, थोडा और के चक्रव्यूह में फंसकर वह अशान्ति और असन्तोष को ही आमंत्रण देता है। सन्तोष के साधन के लिये आपके पास वर्तमान में जो कुछ है, उस पर सन्तोष करें, उसका लाभ उठायें। इसका अर्थ यह...

  • अनमोल वचन

    कई लोगों की बडी-बडी आकांक्षाएं होती हैं। वे जीवन में बडे-बडे सपने देखते हैं। कल्पना क्षेत्र में उडते हुए क्या-क्या बन जाते हैं। कई महापुरूषों की जीवनी पढकर उनके बारे में सुनकर वैसा ही बन जाना चाहते हैं। ये सब ठीक है, आदमी को महत्वाकांक्षी होना भी चाहिए, ऊंचे स्थान पर पहुंचने के सपने भी देखने चाहिए,...

  • अनमोल वचन

    आदमी का मन चंचल होता है और दुर्बल भी। बहुधा बाह्य और आन्तरिक मन में एक रूपता भी नहीं होती। आन्तरिक मन नैतिक मूल्यों पर कायम रहने की प्रेरणा देता है, परन्तु बाह्य मन उससे एकरूपता पैदा नहीं कर पाता। मन की शान्ति के लिये इस प्रकार की दुविधा को मिटाकर इनमें सामंजस्य पैदा करना अति आवश्यक है अर्थात जैसा...

  • अनमोल वचन

    जीवन में असंतोष और अशांति क्यों पैदा होते हैं? इसका कोई उत्तर नहीं दिया जा सकता। मानव जीवन में दृश्य-अदृश्य अनेक कारण हैं, जो अशान्ति और असन्तोष पैदा कर देते हैं, फिर भी मनुष्य की दुविधा मय स्थिति, यथार्थ से आंखें मूंदकर कल्पना लोक में विचरण करना, जीवन जीने का अस्वाभाविक मार्ग अपनाकर अपने आपके...

  • अनमोल वचन

    संसार में जितने भी जलचर, नमचर और मूचर हैं, सब अपने भोजन और प्रजनन क्रियाओं में ही व्यस्त रहते हैं। समस्त प्राणियों में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। इसके बावजूद अधिकांश मनुष्य इसी प्रकार का जीवन यापन करते दिखाई देते हैं, फिर मनुष्य और पशु में अन्तर ही क्या रह जाता है। ये पशु प्रवृत्तियां केवल...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य जीवन के क्रियाकलाप बडे विचित्र हैं। मनुष्य मन से जो चिंतन करता है, उसे वाणी से कहता है, जो वाणी से कहता है, उसे शरीर से करता है और शरीर द्वारा किये गये कर्मों के फल प्राप्त करता है। यदि मनुष्य अच्छे फलों की कामना करता है तो अपनी वाणी से अच्छे शब्दों का उच्चारण करे। यदि वह चाहता है कि अपनी...

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