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  • अनमोल वचन

    गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा 'उद्धरेदात्मनात्मनम्, नात्मान मम सादेयत्' अर्थात हम स्वयं ही अपना उद्धार कर सकते हैं, अन्य कोई नहीं। इस शिक्षा को पक्की तरह अंकित कर लें। अकेले ही आगे बढने के लिये, मार्ग पाने के लिये आपको अपनी आत्मा पर विश्वास करना होगा, उसे ही अपना सर्वस्व समझना होगा। आत्म स्वत्व...

  • अनमोल वचन

    कभी आपने विचार किया है कि आपके अकेले में भी एक महान शक्ति निवास करती है। ऐसी महान शक्ति जो संसार को हिला सकती है और इसी के बल पर अकेला व्यक्ति शक्तिमान निद्र्वन्द रह सकता है, वह है आत्मा की शक्ति। वेद कहता है 'अहमिन्द्रो न पराजिग्ये' अर्थात मैं आत्मा हूं, मुझे कोई हरा नहीं सकता। आप अकेले हैं, तब...

  • अनमोल वचन

    संसार में शक्तिशाली वही है, जो आत्मनिर्भर है और कमजोर वह है, जो दूसरों का मुंह ताका करते हैं। दूसरों के ऊपर उम्मीदें लगाये बैठे रहते हैं। परावलम्बी को, दूसरों के सहारे चलने वाले लोगों को अपने जीवन का बहुत समय नष्ट करना पडता है। नेपोलियन के शब्दों में 'जो अकेले चलते हैं, वे तेजी से आगे बढते हैं।...

  • अनमोल वचन

    यदि आप उस स्थान पर खड़े हैं, जहां सभी ने आपका साथ छोड़ दिया है, आपसे मुंह मोड लिया है, आपसे नाता तोड लिया है, तो निराश होने अथवा घबराने की आवश्यकता नहीं। आपसे पहले भी अनेकों अकेले चल चुके हैं। अपने पैरों पर जीवन यात्रा कर चुके हैं। आप अकेले हैं, यह अनुभव कर लेना आपके लिये वरदान सिद्ध होगा। इसका...

  • अनमोल वचन

    यह तथ्य सर्वविदित है कि परम पिता परमात्मा निराकार है, उसका कोई आकार नहीं, कोई चेहरा नहीं। साकार रूप में उसकी भक्ति ओर आराधना का वेदों में कोई विधान भी नहीं है। वैसे यह पूरा ब्रह्माण्ड उसका साकार रूप है। प्रकृति की छटां में उसका दिग्दर्शन किया जा सकता है, परन्तु सच्चाई यह भी है कि सामान्य मनुष्य के...

  • अनमोल वचन

    हम अपने जीवन में तृप्ति और सन्तोष पाना चाहते हैं, जिसके लिये हम धन संग्रह, भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति और भोगों के संग्रह में लगे रहते हैं, परन्तु अतृप्ति और असन्तोष जीवन में बने रहते हैं। याद रहे तृप्ति केवल ईश्वर भजन और उसकी भक्ति से ही मिल सकती है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा में बताया है 'राम कथा...

  • अनमोल वचन

    विचारों में तो सभी आदर्शवादी होते हैं। योग्य-अयोग्य, सुकर्म- अकर्म और पाप-पुण्य की अनुभूति तो मूर्ख और पापी को भी होती है, किन्तु व्यवहारिक जीवन में हम उसे भूल जाते हैं। आचरण बहुधा उसके विपरीत होता है। धर्म क्या है, यह जानते-समझते भी उसमें प्रवृत्त नहीं होते और अधर्म को जानते हुए भी उससे निवृत नहीं...

  • अनमोल वचन

    हम कुछ कर्म करें या न करें, जो घटित होना है, वह घटनाएं स्वत: ही घटेगी। इसलिए हमारे करने से ही कुछ होगा, हमारे बिना कुछ नहीं होगा अर्थात हम कुछ करें या न करें, जो होना है, वह होगा, यह सोच ही निरर्थक है, गलत है। व्यक्ति को सदा कर्मशील होना चाहिए। अपने कर्म करने के विषय में गम्भीर और निष्काम दोनों...

  • अनमोल वचन

    कर्म और कत्र्तव्य ये दो ऐसे शब्द हैं, जिनसे हर मनुष्य का वास्ता पडता है। कर्म किये बिना कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं रह सकता। यदि कोई न भी चाहे तो भी वह कर्म करता है और वह जैसा कर्म करता है, उसके अनुरूप उसका फल भी मिलता है। यदि कोई न भी चाहे तो श्वास लेगा। न चाहते हुए भी विचार करने को वह स्वयं...

  • अनमोल वचन

    कामनाएं असीम हैं, क्या इनका कभी अन्त हुआ है? ये तो सदैव बढती जाती हैं। जब विवेक जागता है, तभी ये शांत होती हैं। जब कामनाएं शांत हो जाती हैं, तभी हम तृप्त होते हैं। जहां हम हैं, जैसे भी हैं, उसी में आनन्द से परिपूर्ण हो जाते हैं, जैसे हम हैं, उसी में गदगद हो जाते हैं। उसी क्षण कामनाओं के बुलबुले से...

  • अनमोल वचन

    आज देश को स्वतंत्र हुए 71 वर्ष पूरे हुए, 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने को उद्यत है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये कितनी माताओं के सपूतों ने हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर किये, नई पीढी को कदाचित ज्ञात ही नहीं। गुलामी के अभिशाप से वे अनभिज्ञ हैं। इसीलिये उन्होंने स्वतंत्रता के मायने स्वछन्दता मान लिया।...

  • अनमोल वचन

    मनुष्य की एक बड़ी दुर्बलता यह है कि अपने प्रारब्ध के अनुसार हमें जो भी प्राप्त है, उससे वह तृप्त और संतुष्ट नहीं होता। कुछ और बन जाये, कुछ और मिल जाये तो तृप्ति हो जाये। गांव के सरपंच की चाहत होती है कि वह विधायक बन जाये। सरपंच होने में जितनी मान प्रतिष्ठा है, विधायक बनने में उससे अधिक है। जब...

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