अनमोल वचन

अनमोल वचन

आदमी को कडा परिश्रम करते हुए अपनी शक्ति और क्षमता पर भरोसा रखते हुए स्वावलम्बी बनना चाहिए। स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। स्वावलम्बी व्यक्ति अपनी शक्तियों को पहचानता है। जो अपनी शक्तियों के बारे में अनजान है, वह स्वावलम्बी बन ही नहीं सकता। आत्मविश्वास के अभाव में वह सहारे के लिये दूसरों की ओर देखता है। स्वावलम्बन एक प्रकार की ऐसी परीक्षा है, जो हमें अपनी शक्तियों पर निर्भर रहना सिखाती है। अपनी शक्तियों को पहचानने और उन पर भरोसा रखने वाला व्यक्ति सदा आत्मविश्वास के सहारे आगे बढता है, उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की अनोखी चमक होती है। वह ईश्वर के प्रति भी आस्थावान होता है। ऐसा व्यक्ति बिना किसी साजो सामान के जंगल में भी चला जाये तो वह वहां भी कुछ न कुछ करके अपनी आजीविका कमा लेता है, अपनी समस्याओं का समाधान खोज लेता हे। स्वावलम्बी अपने छोटे-छोटे साधनों से ही अपनी आवश्यकताएं पूरी करके बडे से बडा लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। उस पर केवल एक धुन सवार रहती है कि मुझे अपना लक्ष्य प्राप्त करना है। कितना भी परिश्रम करना पडे, उसे सफलता प्राप्त करनी ही है, जिसे वह प्राप्त करता भी है।

Share it
Top