अनमोल वचन

अनमोल वचन

श्रमशीलता ही सफलता की कुंजी है, यह सर्वमान्य सत्य है, परन्तु उसके साथ ऐसे उपाय भी करने चाहिए, जिनसे हमारी कुशलता और क्षमता बढ़े। श्रम तभी उपयोगी बनता है, जब उसके साथ कुशलता और अनुभव का योग हो, काम तो कोई भी कर सकता है, परन्तु कुशल हाथों से किये गये कार्य सुन्दर तथा सराहनीय होते हैं। कुशलता प्राप्त करने के लिये कठिन श्रम करना पडता है। जब यह कार्य लम्बे समय तक किया जाता है, तब कहीं जाकर कुशलता की योग्यता अर्जित होती है। इस संसार के जितने भी आश्चर्य है, जिन्हें देखकर लोग चमत्कृत होते हैं, वास्तव में वे मानव के हाथों के श्रम और बुद्धि की कुशलता के ही अद्भुत चमत्कार है। उनमें श्रम का सौंदर्य है। श्रम की प्रगति का आधार है। एक विद्वान का कथन कितना सत्य है 'प्रतिभाशाली व्यक्तियों की प्रतिभा का मूलमंत्र उनके श्रम में है? जिस वस्तु को मूल्यवान माना जाता है, उसमें उसकी उस विशेषता को पैदा करने का पूरा श्रेय कर्ता के श्रम और बुद्धि कौशल को ही देना चाहिए। इसलिए श्रम के साथ कौशल विकास को महत्व दिया जाना चाहिए, किन्तु यह भी सत्य है कि कौशल भी श्रम के अभाव में अपना चमत्कार दिखाने में असमर्थ ही रहेगा। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। श्रेष्ठता के लिये दोनों आवश्यक हैं।

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