अनमोल वचन

अनमोल वचन

स्वर्ग-नरक की कल्पना हम इस धरती से इतर अन्य लोकों में करते हैं। इसमें कोई अंश सच्चाई का नहीं है। वस्तुत: हमारे गृहस्थ ही, हमारे घर ही स्वर्ग-नरक की परिभाषा में आ जाते हैं। यदि आपने अपनी पत्नी को इस आंख से देखा है कि प्यार की देवी, त्याग की देवी, बलिदान की देवी, सब कुछ छोडकर, अपने मां-बाप को छोडकर आपके पास चली आई। मां-बाप का मोह छोड दिया, भाई-बहनों का मोह छोड दिया। पूरे दिन नौकरानी की तरह न दिन की ख्याल किया, न रात का, न नौकरी की मांग की, न बोनस की, न पैसे की मांग की, कुछ भी तो नहीं मांगा। चौबीसों घंटे दिन-रात काम करती है, अंगुली के इशारे पर कुठपुतली की तरह नाचती रहती है, प्यार देखना है तो दो जगह देखा जा सकता है, या तो मां की छाती में दूध की तरह बहता हुआ या दूसरा प्यार पत्नी के रूप में, जिसने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। पराये आदमी पर विश्वास किया और पूरा हक दिया, यह सोचकर कि यदि धोखा देगा तो देखा जायेगा। वह घर की देवी है, सरस्वती है, लक्ष्मी है, दुर्गा है। यदि हमने इस दृष्टि से अपनी धर्मपत्नी को कभी देखा होता, कभी पत्नी को प्यार भरी दृष्टि से देखा होता। अभावों में सूखी रोटी और छाछ पीकर यदि आप दोनों की आत्मा में प्यार की भावना बढ़ रही होती तो प्यार की गंगा, यमुना घर में प्रवाहित हो रही होती तो आपको ज्ञात होता कि स्वर्ग किसे कहते हैं।

Share it
Share it
Share it
Top