अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारी अन्तरात्मा परमात्मा का ही अंश है। वह सर्वज्ञ हमारी अन्तरात्मा के माध्यम से हमें नित सही मार्गदर्शन करता रहता है। अन्तरात्मा की आवाज हम तभी सुन सकते हैं, जब मन शांत हो। जिस प्रकार स्थिर जल शांत होता है, स्थिर जल में फेंका गया कंकड उसमें तरंगें उत्पन्न कर देता है। लहरे पैदा कर देता है। उसी प्रकार मन में तरंगें उठती हैं और वह शांत नहीं रहता। तरंगों की अशान्ति अन्तरात्मा की आवाज को सुनने में बाधा उत्पन्न करती है। यदि अन्तरात्मा की आवाज को सुनना है तो मन की तरंगों को शांत करना होगा, तभी आवाज हमें अपने वास्तविक रूप में सुनाई देगी। हम अपने जीवन में जो कुछ देखते सुनते और समझते हैं। पढकर ज्ञान अर्जित करते हैं। उसे ही यथार्थ ज्ञान मन लेते हैं, किन्तु वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता, वह कई प्रकार के भ्रमों से युक्त होता है। केवल अन्तरात्मा का ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान नहीं होता, क्योंकि वह परमात्मा का दिया हुआ ज्ञान होता है। शुद्ध-बुद्ध एवं चेतन होने से अन्तरात्मा को अज्ञान का अंधकार कभी नहीं व्यापता। उसके दिये ज्ञान के अनुसार ही किये गये कार्य सर्व हितकारी होते हैं। उसकी अवहेलना की जायेगी तो निश्चित ही उसके परिणाम दुख-क्लेश और अशांति के रूप में ही प्राप्त होंगे।

Share it
Share it
Share it
Top