अनमोल वचन

अनमोल वचन

जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिये व्यायाम की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिये मन के व्यायाम की आवश्यकता होती है। मन के व्यायाम के लिये हमें सदा सकारात्मक और सबके प्रति शुभ भावनाएं और शुभ कामना युक्त विचार रखने चाहिए। किसी की भी नकारात्मक बातों को अपने मन में न रखें, हम परमात्मा की शक्ति तभी अनुभव कर सकते हैं, जब हमारा मन पवित्र हो। सबके लिये शुभ ही सोचें, अशुभ किसी के लिये भी नहीं। मन का एक व्यायाम यह भी है कि हम सदा प्रसन्न रहें। प्रसन्नता के समान कोई खुराक नहीं। यह मन के लिये तो लाभदायक है ही, शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिये भी लाभकारी है। प्रसन्नता हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। सदा प्रसन्न रहने वाला व्यक्ति स्वयं तो प्रसन्न रहता ही है, परन्तु उसे देखकर सबको खुशी का अनुभव भी होता है। वास्तव में आज मानव जो भी करता है, खुश रहने के लिये ही करता है, परन्तु स्वयं की पहचान न होने के कारण उस खुशी को भाँतिक पदार्थों में ढूंढता है, जबकि खुशी तो हमारे भीतर ही है। सदा प्रसन्न रहें, स्वयं हंसे और दूसरों को भी हंसायें। विशेष रूप से उन अभागों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करें, उनके आंसू पोंछने का काम करें, जिनकी परिस्थितियों ने खुशी छीन ली और अभावों ने उन्हें आंसू बहाने को मजबूर कर दिया।

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