अनमोल वचन

अनमोल वचन

परोपकार और दूसरों की भलाई के कार्यों की बहुत बडी महिमा है। इन्हीं करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। सदैव भलाई के कार्य करें। बुराई और पाप कार्य मन, वाणी और कर्म द्वारा सदैव त्याज्य हैं। भलाई का कार्य करने वाले और उन कार्यों से प्रभावित होने वाले दोनों का भला होता है। भलाई के कार्यों में यदि कुछ कमी रह जाती है तो उसी अनुपात में उसके फल परिपाक (पकने) में कुछ अधिक समय लगता है। शुभ कर्म का फल समय के गर्भ में जब तक पक नहीं जाता, तब तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनी चाहिए। कम स्वादिष्ट, कम उपयोगी फलों के वृक्ष एक वर्ष में ही काफी बडे हो जाते हैं, उनकी आयु भी कम होती है, किन्तु स्वादिष्ट आम धीरे-धीरे बढता है, काफी समय बाद फल देता है, किन्तु फल लम्बी अवधि तक देता है। शुभ कर्मों का फल भी विलम्ब से प्राप्त होता है, किन्तु उनसे प्राप्त होने वाले आनन्द में आम के फल की भांति मिलने वाले आनन्द में में कोई संदेह नहीं। आनन्द की अवधि भी लम्बी होती है। बुराई कितनी भी छोटी क्यों न हो, उसके परिणाम भी औंधे सीधे ही होते हैं। उससे न व्यक्ति (बुराई करने वाले) का भला होता और न समाज का। केवल अहित ही होता है। बुराई से बुराई ही बढती है और समाज को अधोगामी बनाती है, इसलिए सदा बुराई के कार्यों से अपने को और अपनों को बचाये रखें।

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