अनमोल वचन

अनमोल वचन

अपने जीवन में मनुष्य द्वारा किये गये अपराधों के पश्चात जब उसका विवेक जागृत होता है तो वह पछताता है और यदि उसे सौभाग्य से अच्छे लोगों की संगति मिल गई तो वह पश्चाताप भी करता है। यदि अपश्चाताप अन्तर्मन से किया जाये तो आगे का जीवन भी सुधर जाता है। ऐसे में वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी भी बन सकता है। पश्चाताप यदि केवल दिखावे के लिये किया जायेगा तो उससे कोई लाभ होने वाला नहीं। इसके लिये उसे अच्छे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। जो सर्वप्रथम अपराधी के भीतर विवेक जागृत करता है और उसके पश्चात उसे पश्चाताप की सही विधि बताता है। आदि काल से राक्षसों के भी गुरू होते थे, जैसे शुक्राचार्य थे। अपराध बोध मन और आत्मा पर लगा ऐसा घाव होता है, जिसे केवल योग्य गुरू से किसी चिकित्सक की भांति ठीक कर सकता है। संसार के लगभग सभी धार्मिक विश्वासों और मतों के भीतर अपराध बोध से मुक्ति के उपाय बताये गये हैं। चिकित्सा तभी हो सकती है, जब रोगी स्वयं स्वीकार करे कि वह रोगी है और उसे रोग का कारण ज्ञात हो और वह उन कारणों को दूर करे अर्थात उन पाप कर्मों के लिये पश्चाताप करे तथा भविष्य में ऐसा न करने का संकल्प करे।

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