अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में मानसिक व्याधियों से ग्रसित व्यक्तियों की संख्या दिनोंदिन बढती जा रही है। इसके प्रमाण में मनोचिकित्सकों के यहां भीड देखकर आंकी जा सकती है। मानसिक व्याधियों का एक बडा कारण अपराधबोध का भार भी है। मनुष्य विवेकहीनता और पशुप्रवृत्ति की स्थिति में अपराध कर बैठता है, परन्तु जब उसकी आत्मा और विवेक दोबारा प्रबल होकर अपराध की विवेचना करते हैं तो मनुष्य अपराध बोध से भर जाता है और इस कारण कभी-कभी मानसिक संतुलन खो बैठता है। कभी-कभी स्थिति यह आ जाती है कि इस असंतुलन की स्थिति में व्यक्ति आत्महत्या तक कर डालता है, जैसा कि हिटलर ने किया था। अमेरिका के एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक ब्रायन बास ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि पुनर्जन्म सत्य है और जीव अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुरूप अगले जन्म में वैस ही मनोस्थिति तथा व्यक्तित्व प्राप्त करता है। उसके द्वारा पूर्व जन्मों में किये गये अपराधों की छाया इस जन्म के कर्मों पर भी पडती है। यह निष्कर्ष उन्होंने अपनी खोज और तथ्यों के आधार पर लिखा है। मनोचिकित्सकों और अध्यात्मिक गुरूओं के प्रयासों के बाद भी इस व्याधि की कारगर चिकित्सा सम्भव नहीं हो पाई। इससे मात्र एक सीमा तक मन से किया गया पश्चाताप और प्रभु से की गई प्रार्थना द्वारा ही मुक्ति पाई जा सकती है।

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