अनमोल वचन

अनमोल वचन

विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार अधिकांश बुजुर्ग अपने परिवार के साथ खुश नहीं हैं। धन की कमी हो अथवा धन के बंटवारे का झगडा हो, अधिकांश विवादों की जड में धन ही है। उन बुजुर्गों से अपेक्षाएं तो परिवार के सभी लोगों को रहती है, किन्तु उनकी भावनाओं का, उनकी चाहत का निरादर किया जाता है। उन्हें बोझ समझा जाता है, जबकि वे घर के लगभग सभी काम करते हैं। वृद्धावस्था में भी उनसे उनकी सामथ्र्य से अधिक कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। उनकी सम्पत्ति पर तो सबकी निगाहें रहती हैं, परन्तु उनके प्रति परिजनों के कुछ कत्र्तव्य हैं, यह भुला दिया जाता है। अपनों के बीच उन्हें अजनबी समझा जाता है। उन्हें बात-बात पर ताने सुनने को मिलते हैं। अनेक बुजुर्गों को तो गालियां तक सुननी पडती है, दुत्कार सहनी पडती है। सदियों से हमारा देश विश्व में अपने मूल्यों और सामाजिक मर्यादा बोध के लिये प्रसिद्ध रहा है, परन्तु आज केवल यह दिखावा मात्र है। यदि कोई व्यक्ति भरे पूरे परिवार में स्वयं को अकेला महसूस करता है, तो इसमें दोष किसका है, दोष किसी और का नहीं, बल्कि घर के सभी सदस्यों का है, घर की नींव तैयार करने वाले ये बुजुर्ग ही होते हैं। यदि ये बुजुर्ग अपनों के बीच बेगानों की तरह रहते हैं और आप कांवड जैसी परम्परा का निर्वहन कितनी भी श्रद्धा से कर रहे हैं तो ऐसे तमाम दिखावे किसी काम के नहीं।

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