अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमें जो चाहिए उसका मिलना सुख है और जो नहीं चाहिए वह मिल जाये तो दुख का कारण बन जाता है। हम हर समय कुछ न कुछ प्राप्त करते रहते हैं। ये सुख क्षणिक होते हैं और प्राप्त होने के कुछ समय बाद ही नष्ट भी हो जाते हैं, जिसके कारण हम उदासीन हो जाते हैं। मनुष्य सुख ऐसे प्राप्त करना चाहता है, जो कभी समाप्त न हो, परन्तु ऐसा अक्षय सुख हर किसी के लिये दुर्लभ है। गीता के अनुसार जो बाह्य स्पर्श के विषयों पर आसक्त नहीं है, उसे अपनी आत्मा में सुख प्राप्त होता है, क्योंकि उसी की आत्मा परमात्मा से योग करने में सक्ष्म होती है और उसी को अक्षय सुख की प्राप्ति होती है। इस परम सुख की प्राप्ति के दो ही उपाय हैं, पहला भोगों से अनासक्ति और दूसरा परमात्मा के साथ योग है। सुख के तीन प्रकार हैं तामस, शजस और सात्विक। निंद्रा और आलस्य से तामस, इन्द्रियों और इनके विषयों में राजस, किन्तु जो सुख आत्मनिष्ठ बुद्धि के फल से प्राप्त होता है, वह सात्विक सुख है और ऐसा ही सुख अक्ष्य सुख कहलाता है। वह कभी कम या नष्ट नहीं होता। ऐसे सुख की प्राप्ति कठिन तो है, परन्तु असम्भव हो, ऐसा बिल्कुल नहीं।

Share it
Share it
Share it
Top