अनमोल वचन

अनमोल वचन

क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य कैसे चलता है, पृथ्वी कैसे घूमती है, चन्द्रमा कैसे घटता-बढता है, दिन कभी छोटा तो कभी बडा कैसे होता है। यदि नहीं सोचा तो इसके बारे में सोचें, नहीं सोच पाये, नहीं समझ पाये तो फिर चिंता क्यों करते हैं। यदि यह आपकी समझ से परे है तो अकारण चिंता क्यों करते हैं। अब सोचें कि चिंता का अर्थ क्या है। सच पूछो तो यह चिंता ही है जो हमारी सबसे अधिक हानि करती है। प्रश्न यह उठता है कि यह चिंता कौन सी बला है, वस्तुत: चिंता हमारे बीते जीवन की वे घटनाएं हैं, जिन्हें हम कभी भूल नहीं पाते और जब हम भुला नहीं पाते तो हमारा वर्तमान प्रभावित होने लगता है। वर्तमान के प्रभावित होते ही हमारा भविष्य नष्ट होने लगता है। जो बीत गया, उसके बारे में चिंता कर हम अपना वर्तमान भी खराब करने लगते हैं। आज हम कितना कुछ एकत्र कर रहे हैं, यह सोचकर कि हमें कल सुख मिलेगा, परन्तु इसके लिये आज कष्ट झेल रहे हैं। इससे भी अधिक कोई कष्ट आने वाला है क्या? यदि आने वाला है तो भी हम सहेंगे, परन्तु चिंता कर हम अपने पथ में रोडे बिखेर रहे हैं, इसलिए भविष्य की चिंता त्याग वर्तमान में जियें, किन्तु हम या तो भूत में जीना चाहते हैं या भविष्य में। जिनमें केवल चिंताएं ही हैं, फिर ऐसा जीवन जीकर हम अपना वर्तमान क्यों बिगाडें।

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