अनमोल वचन

अनमोल वचन

दु:ख मनुष्य की एक नकारात्मक मानसिक स्थिति है। दुख की स्थिति का निर्माण आदमी स्वयं करता है, जो बहुधा दूसरों के कारण किया जाता है। अपने कारण कोई भी व्यक्ति न तो दुखी होता है और न सुखी। इनमें सदैव दूसरे ही निमित्त बनते हैं अर्थात इन्हें हम दूसरों के कारण ही अनुभव करते हैं। दुख और सुख को जब हम स्वयं ही लेने को तैयार बैठे होते हैं, तभी वें हमारे पास आते हैं। उदाहरण के लिये जिस प्रकार हमें कोई वस्तु देता है और हमें उसकी आवश्यकता नहीं होती तो हम उसे लौटा देते हैं। उसी प्रकार कोई हमें दुख देना चाहे और हम दुख लेने को राजी न हों तो वह स्वयं लौट जाता है और देने वाले को ही सताने लगता है। यद्यपि हममें से अधिकांश लोग पहले से ही दुख को स्वीकार करने के लिये खडे रहते हैं। कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि कोई दुख देने वाला नहीं आता, तो उसे स्वयं ही बुलाकर ले आते हैं। इसका कारण है कि दूसरों की प्रत्येक वस्तु हमें अच्छी लगती है, चाहे वह अच्छी हो या न हो। यह मानव स्वाभाव है कि उसे दूसरे का सब कुछ अच्छा लगता है। यही आपके दुख का कारण बन जाता है। गांव हो या शहर हो, वहां न तो किसी को फुर्सत है कि आपको दुख दें या सुख दें। आप तो स्वयं हाथ पसारे सडकों पर घूम रहे हैं कि कोई हमें धक्का मारे और हम दुखी हो जायें।

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