अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रसिद्ध विचारक खलील जिब्रान कहते कि उन्होंने निर्दयी लोगों से दयाभाव, अधीर लोगों से धैर्य और बातूनी लोगों से शांत रहना सीखा। रामचरित मानस में तुलसीदास जी देवी देवताओं के साथ उन राक्षसों की भी वंदना करते हैं, जिनका पर पीडा से सुख प्राप्ति स्वाभाव है। कदाचारियों के प्रति द्वेष, घृणा, शत्रुता या वैमनस्य भाव रखने से नेक इन्सान की ऊर्जा निष्फल कार्यों में खर्च होगी और वह मनोयोग से अपने ईष्ट लक्ष्य की ओर अग्रसर नहीं रह सकेगा। सत्यपथ के अनुगामी को विघ्नकारियों की कुचेष्ठाओं में उलझकर मन को डांवाडाल नहीं होने देना है। अर्जुन की भांति लक्ष्य पर केन्द्रित रहना है। एकाग्रता से ही लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित हो सकता है, किन्तु मन में कदाचारियों के प्रति भी घृणा, क्रोध आदि के भाव रहेंगे तो मन का एकाग्र होना असम्भव है। स्मरण रहे कदाचारियों द्वारा निर्मित संकट और प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझकर सत्यनिष्ठा और अधिक सुदृढ और परिकृष्त होती है। आप तो केवल सत्य के प्रति निष्ठावान रहकर सन्मार्ग पर चलते रहें, शेष सब ईश्वर पर छोड दें।

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