अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रगति के नाम पर बहुमंजिली इमारतें, कालौनियां बन रही हैं। बडी-बडी लम्बी-लम्बी कारों का काफिला खडा हो रहा है। बडी-बडी, चौडी-चौडी सडकें बन रही हैं, मॉल बन रहे हैं, परन्तु डर है कि बडे-बडे मॉल, कालौनियों और बडी-बडी सडकों के नीचे कहीं मानवता दब न जाये। कहीं इस प्रगति के दौर में मनुष्य किसी खंडहर में छिप न जाये, प्रगति केवल साधनों तक सीमित न रह जाये, क्योंकि समस्त साधन हमें सुखी बनाने के लिये उपलब्ध किये जा रहे हैं। भय यह है कि इन साधनों के नीचे मनुष्यता दब न जाये। बडे-बडे शहरों में देखा जा रहा है कि पचास लाख की गाडी में एक बीमार चिंताग्रस्त व्यक्ति बैठा है। कालौनियों में बडे-बडे मकान हैं, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं, परन्तु उन मकानों में जो रह रहे हैं, वे बडे अशांत हैं। वहां खडा मानव तनाव और चिंताग्रस्त है। ऐसा इसलिए कि मकान तो बन गये हैं, ए.सी. लग गये हैं, आरामदायक वस्तुएं उपलब्ध हो गई हैं, परन्तु उनमें रहने वाले आज भी चिंताग्रस्त हैं, अशांत हैं। इसलिए प्रगति तो है, परन्तु पहले प्रगति मनुष्य के अन्त:करण से शुरू हो, क्योंकि जब सारी विकास यात्राएं मनुष्य के लिये हो रही हैं, तो पहले मनुष्य को एक स्वस्थ मानव बनाने की आवश्यकता है, ताकि वह प्रगति के रस को पी सके।

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