अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारी मस्ती, हमारी किलकारी, हमारी हंसी पर किसी की नजर लग गई। किसी खराब आदमी की नजर लग गई हमारी मस्ती पर, हमारी हंसी पर। किसने हमारी हरी भरी बगिया को आग लगा दी। मुझे लगता है हमारा अन्तर्मन, अकर्षण और प्रेम से रूठ गया। हम मरूभूमि बन गये हैं। यही करण है जहां चमेली की बगिया हुआ करती थी, वहां अब कटीले वृक्ष आ गये हैं। यही कारण है हम इतने तनावग्रस्त, चिंताग्रस्त बनते जा रहे हैं, हमारे सारे अरमान सूख गये, प्रेम की धरा रेत में विलीन हो गई। आज आवश्यकता है हमारे जीवन में प्रेम पैदा किया जाये, ताकि आज जो हम नफरत की आग में जले जा रहे हैं, घृणा और आवेश के कारण हमारा जीवन विषवृक्ष बन गया है। पहले हमें अन्र्तमन की सफाई करनी चाहिए और वहीं विष वृक्ष के स्थान पर स्वस्थ पौधा लगाना चाहिए, तभी उसमें सुन्दर फूल खिल सकेंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि जितनी भी हमारी विकास यात्राएं चल रही हैं, वे सब हमारे लिये हैं। मनुष्य को सुखी कैसे बनाया जाये, हमारी विकास यात्रा का यही उद्देश्य है। यदि मनुष्य दुखी है, सन्तप्त है, तनाव ग्रस्त है, तो वह प्रगति होते हुए भी प्रसन्न और सुखी कैसे रह पायेगा।

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