अनमोल वचन

अनमोल वचन

हर व्यक्ति दावे से कहता है कि 'उसे असत्य से नफरत है, मुझसे सत्य छिपाया नहीं जाता, परन्तु होता है उसके उल्टा। पति-पत्नी से, पत्नी-पति से, सहयोगी अधिकारी से, मित्र मित्र से सत्य को छिपाता है, जब हम पग-पग पर असत्य का व्यवहार करेंगे, तो सत्य के दर्शन कैसे होंगे? असत्य हमारे भीतर इतना पैठ कर गया है कि धुरन्धर तत्व चिंतक भी दोहरी मान्यताएं ढोते रहते हैं। सत्य का सौम्य पाने के लिये मन की कुटिलता और चित्त की काई (मैल) को साधना के मंजन से साफ करना होगा। सत्य के अमूल्य रत्न को पाने के लिये हमें कुछ मूल्य तो चुकाना ही होगा। वह मूल्य चुकाया था हमारे ऋषि-मुनियों ने। वें वनों और पहाडों में अखंड साधना करते रहे। चीनी यात्री ह्वेनसांग ज्ञान की खोज में भारत आया था। सत्य की तलाश में वह गुरूकुलों ओर आश्रमों में गया। वहां से योग्य शिक्षकों को लेकर चीन वापस गया और वहां सत्य के ज्ञान का बीज बोया। ह्वेनसांग भारतीय धर्म दर्शन की कुछ पांडूलिपियां साथ लेकर गया, जिनमें साधना का सार था। इस प्रकार विश्व में पहुंचा भारत का ज्ञान सूर्य। इन पांडुलिपियों में साधकों के जीवन का तप और सत्य छिपा है।

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